For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

औरत वही जो औरों के हित देती अपनी क़ुरबानी 
नारी जीवन शीतल सा पानी और चंदा सी चांदनी ||
 
औरों के हित रत, खुद का तन तपता रेगिस्तानी 
आदमी का भ्रूण सहर्ष सैहती दे अपनी बच्चेदानी ||
 
औरत  त्याग की मूरत, ढक घूँघट में अपनी सूरत 
थकी-हारी मशीनरी सी करती सबकी पूरी जरुरत ||
 
अबला नहीं है औरत मत कुचलों कलियों का अरमान 
अहिल्या औ लक्ष्मी बाई का देख चुके हम बलिदान || 
-
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला,जयपुर 

Views: 972

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 28, 2012 at 10:04am

स्नेहिल श्री अलबेला खत्रीजी, कुमार गौरव अजितेंदुजी, रेखा जोशीजी,राजेश कुमारीजी "औरत की क़ुरबानी" पर हम सभी नत मस्तक है और सभी माता के ऋण से मुक्त नहीं हो सकते | आप सभी का हार्दिक आभार और स्नेह बनाए रखने के लिए दर्दिक धन्यवाद

व्यंग दोहे "अर्थ तंत्र पर भारी" latest  blogs में छपने से रह गया कृपया पढ़ कर मार्ग दर्शन करे - लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला 
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 28, 2012 at 10:00am

स्नेहिल श्री अलबेला खत्रीजी, कुमार गौरव अजितेंदुजी, रेखा जोशीजी,राजेश कुमारीजी 

"औरत की क़ुरबानी" पर हम सभी नत मस्तक है और सभी माता के ऋण से मुक्त नहीं 
हो सकते | आप सभी का हार्दिक आभार और स्नेह बनाए रखने के लिए दर्दिक धन्यवाद 

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 28, 2012 at 8:45am

नारी के त्याग सहनशीलता ,वीरता बलिदान सभी का बहुत सुन्दर विश्लेषण किया है कुछ ही पंक्तियों में आपने ...बहुत उम्दा ..आपको हार्दिक   बधाई 

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 27, 2012 at 8:21pm
बिलकुल सही कहा आपने आदरणीय लक्ष्मण सर...
Comment by Rekha Joshi on June 27, 2012 at 8:07pm

आदरणीय लक्ष्मण जी ,

औरत  त्याग की मूरत, ढक घूँघट में अपनी सूरत 
थकी-हारी मशीनरी सी करती सबकी पूरी जरुरत |,नारी त्याग की मूर्ति है ,नारी पर बढ़िया रचना ,बधाई 
Comment by Albela Khatri on June 27, 2012 at 7:50pm

बहुत खूब लक्ष्मण प्रसाद जी.......

उम्दा कविता  ........

अबला नहीं है औरत मत कुचलों कलियों का अरमान 
अहिल्या औ लक्ष्मी बाई का देख चुके हम बलिदान ||

__बधाई !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
18 hours ago
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
yesterday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service