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क्या लेना


मुझे मंदिर से क्या लेना
मुझे मस्जिद से क्या लेना
मैं दिल से इबादत करता हूँ
मुझे राम, रहीम संग रहना
मैं गीता पढ़ सकता हूँ
गुरु ग्रन्थ साहिब रट सकता हूँ
कुरान और बाइवल मेरे दिल में बसे
मुझे इन सब के संग रहना
मुझे सियासत नहीं आती
बिलकुल भी नहीं भाती
इक सीधा सदा हूँ इन्सान
मुझे इन्सान बनके ही रहना
में 'दीपक कुल्लुवी' हूँ
मुझे है प्यार दुनिया से
मुझे सबसे मुहब्बत है
मुझे और नहीं कुछ कहना

दीपक शर्मा कुल्लुवी

०९१३६२११४८६

०१-१०-२०१०

अयोध्या के शानदार फैसले पर तमाम हिन्दुओं और मुसलमानों को मुबारकबाद

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Comment

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Comment by Deepak Sharma Kuluvi on October 6, 2010 at 12:38pm
sabka dhanyabaad jineh bhi rachana theek lagi

deepak

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 2, 2010 at 2:38pm
सही उद्दगार, बहुत ही बढ़िया बात कही है आपने ,
मुझे मंदिर से क्या लेना
मुझे मस्जिद से क्या लेना
मैं दिल से इबादत करता हूँ,
Comment by आशीष यादव on October 1, 2010 at 4:25pm
bilkul sahi.hm sabhi ek hi bhagwaan ke hai aur w hi hamara hai.

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