For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बादलों पे
थिरकता है हुस्न
अरमानों की
मखमली चादर ओढ़े...
कजरारे नशीले नैन
मासूमियत से मुस्कुराते हैं,
निगाहों निगाहों में 
बूझ पहेलियाँ...
होठों पर लहराती
गुनगुनाती हँसी
सागर की चंचल लहरों सी,
करती है अठखेलियाँ...
गीले चमकीले
मोतियों के चिराग
झिलमिलाते है रिमझिम
गेसुओं पर...
हया की सुर्ख रंगत
बन सोलह  श्रृंगार
देती है
चांदनी सा निखार...
दिल की धड़कन की मदहोशी में
कभी हलचल कभी खामोशी में,
खो जाते हैं
सारे शब्द और भाव...
और
मन होता है
सपनों के बीच..
...............जब
देते हैं दस्तक
मोहब्बत के कदम
जीवन के प्रांगण में.....
 
डॉ. प्राची.....

Views: 738

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Bishwajit yadav on June 14, 2012 at 11:25pm
आदरणीया प्राची जी

दिल की धड़कन की मदहोशी में
कभी हलचल कभी खामोशी में,
खो जाते हैं
सारे शब्द और भाव...
और
मन होता है
सपनों के बीच..
...............जब
देते हैं दस्तक
मोहब्बत के कदम
जीवन के प्रांगण मे

बहुत खुब क्या बात है बहुत अच्छा भाव जय हो
Comment by Ajay Singh on June 14, 2012 at 6:15pm

मासूमियत से मुस्कुराते हैं,

निगाहों निगाहों में      ........ .. . . . . . . . Bahut khub...
Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 14, 2012 at 4:43pm
आदरणीया प्राची जी, मोहब्बत होने के एहसास को खूबसूरती से व्यक्त किया आपने।
Comment by DEEP ZIRVI on June 14, 2012 at 2:49pm

वाह से कुछ ज्यादा hee

Comment by Raj Tomar on June 14, 2012 at 2:16pm

गीले चमकीले

मोतियों के चिराग
झिलमिलाते है रिमझिम
गेसुओं पर...
हया की सुर्ख रंगत
बन सोलह  श्रृंगार
देती है..
 अहा .. बहुत खूब बहुत खूब. :)
Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on June 14, 2012 at 1:25pm

bahut hi sundar kavita he prachi ji bahut bahut mubarak ho

Comment by Albela Khatri on June 14, 2012 at 1:02pm

वाह  वाह डॉ प्राची सिंह जी,,,,,,,,,
बहुत खूब.........शानदार कविता कही आपने........मोहब्बत  और जज़्बात को सुन्दर शब्दों में पिरोने का हुनर खूब आता है आपको
_____बधाई बधाई  बधाई

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 14, 2012 at 10:52am

आदरणीया प्राची जी, सादर 

मेरा सौभाग्य है कि हिंदी , अंग्रेजी न जानते हुए भी कविता का पूर्ण आनंद ले लेता हूँ. अति सुन्दर. बधाई.

Comment by AVINASH S BAGDE on June 14, 2012 at 10:31am

sunder kavita k sath suprabhat....

Comment by AVINASH S BAGDE on June 14, 2012 at 10:30am

और

मन होता है
सपनों के बीच..
...............जब
देते हैं दस्तक
मोहब्बत के कदम
जीवन के प्रांगण में.....
 
डॉ. प्राची ji ...sunder shabd-chitr ukera hai aapane...
कजरारे नशीले नैन
मासूमियत से मुस्कुराते हैं,
निगाहों निगाहों में ....wah!
गीले चमकीले
मोतियों के चिराग
झिलमिलाते है रिमझिम
गेसुओं पर......shabdo ke motiyo se kya khoob piroya hai aapane is sunder mala(rachana) ko...
bahut sunder.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"जय हो "
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद +++++++++ उषा काल आरम्भ हुआ तब, अर्ध्य दिये नर नार। दूर हुआ अँधियारा रवि का, फैले तेज…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Jan 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
Jan 18
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Jan 18
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Jan 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Jan 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Jan 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Jan 18
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Jan 17
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Jan 17
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Jan 17

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service