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आखिर पुलिस ने उस दुर्दांत आतंकवादी को मार गिराया, उसे मार गिराने वाले पुलिस अफ़सर की बहादुरी की भूरि भूरि प्रशंसा हो रही थी तथा उसके लिए बड़े बड़े सम्मान देने की घोषणाएं भी हो रहीं थी. मीडिया का एक बड़ा दल भी आज उसका साक्षात्कार लेने आ रहा था. इसी सिलसिले में वह बहादुर अफ़सर तैयारियों का जायजा लेने पहुँचा.

"सब तैयारियां हो गईं?" उसने एक अधीनस्थ से पूछा
"जी सर !"
"क्या किसी ने लाश की शिनाख्त की:"
"नहीं सर, चेहरा इतनी बुरी तरह से क्षत विक्षत हो चुका था कि पहचान असंभव थी"
"क्या कोई उसकी लाश लेने पहुँचा था ?"
"जी नहीं सर"
"ओके !, क्या किसी को इस सिलसिले में कुछ कहना या पूछना है?"
तभी एक कांस्टेबल ने धीरे से उस अधिकारी के कानो में कहा:
"उसकी रिक्शा का क्या करें सर?".     

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 28, 2012 at 9:46pm

         पुलिस अफसर को मिल गया, दुर्दांत आंतकवादी मार गिराने का सम्मान 

         रिक्शावाले का रिक्शा खड़ा खड़ा, गिना रहा था घरवालों के बुरे दिनमान |
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 28, 2012 at 9:45pm

 

आंतककारी को एनकाउन्तर में मार गिराने का पुरष्कार प्राप्त करने वाले 
पुलिस अफसरों की पोल खोलती सटीक लागु कथा पाठक के मन में गहरी 
छाप छोड़ने वाली है | थोड़े से शब्दों में साहित्यकार का धर्म निभाने का 
प्रभावी माध्यम की सार्थकता परिलक्षित हो रही है | हार्दिक बधाई स्वीकारे |

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on April 28, 2012 at 9:19pm

सादर साभार आदरणीय भ्रमर जी 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on April 28, 2012 at 9:18pm

धन्यवाद मोनिका जी

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 28, 2012 at 9:16pm

आदरणीय योगराज जी एक कडुवे सच को उकेरता आप का ये लेख  दिल को छू गया कितने एन्कावुनटर यही दिखाते हैं ....भ्रमर५ 

Comment by Monika Jain on April 27, 2012 at 10:25pm

Aatankvaad par likhi aapki Laghukatha padi sachmuch atulniy hai aaj ke samay ka bhayavay sach jisme Mazdoor aur aam aadmi k liye koi jagah nahi hai.

Monika


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on April 27, 2012 at 4:21pm

वंदना जी, आभार.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on April 27, 2012 at 4:21pm

सादर धन्यवाद आदरणीय अरुण भाई जी.

Comment by Er. Ambarish Srivastava on April 27, 2012 at 12:06pm

स्वागत है आदरणीय !

Comment by Abhinav Arun on April 27, 2012 at 11:21am

आदरणीय श्री संपादक महोदय !! इस लघुकथा के लिए हार्दिक साधुवाद | आज की व्यवस्था की पोल खोलती इस कथा के ज़रिये आपने आईना दिखाने का कार्य किया है || अपनी पीठ थपथपाने के लिए ये महकमा क्या क्या करता है यह छुपता थोड़े ही है |

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