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पिछली बातों को दुहराना बहुत जरूरी है|
कल को सब बातें बतलाना बहुत जरूरी है|
बहुत जरूरी है अपनी सब भूलों को लिखते जाना,
आशाओं के दीप जलाना बहुत जरूरी है|
बहुत जरूरी है दिखलाना अपने गौरव की झांकी|
श्वेद,रक्त के समझौते और आँखों से रिसता पानी|
अपराधों को सम्मुख लाना बहुत जरूरी है|
पिछली बातों को दुहराना बहुत जरूरी है|

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Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 13, 2012 at 8:19pm

प्रिय मित्र चातक जी,संतोष भाई,प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी,दिव्या बहन और महिमा जी आप लोगों की उत्साहपूर्ण टिप्पड़ियों से मेरा मनोबल बढा है,अतएव आप सभी का सस्नेह आभार|वन्देमातरम

Comment by MAHIMA SHREE on March 13, 2012 at 11:34am
अच्छी रचना मयंक जी बधाई
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 13, 2012 at 9:46am

बहुत जरूरी है  समाज को कुछ दे दिया जाये. मन में न रखा जाये  बहुत सुन्दर भाव पूर्ण अभिव्यक्ति. बधाई.

Comment by Chaatak on March 12, 2012 at 10:10pm

खूबसूरत उद्गारों का प्रकाश प्रस्तुत करने पर हार्दिक बधाई!

Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 12, 2012 at 9:41pm

आभार संतोष भाई..और इस मंच पर आपका स्वागत है..जागरण की अपेक्षा यह मंच अधिक उत्साहित करने वाला है बस नवीनतम ब्ल्ग भी मुखपृष्ठ पर प्रदर्शित होने लगे तो और अच्छा हो जाय|

Comment by Santosh Kumar Singh on March 12, 2012 at 9:34pm

अब यहाँ पर भी रचनाये डालना शुरू करता हूँ ,..बहुत आभार संदीप भाई 

Comment by Santosh Kumar Singh on March 12, 2012 at 9:33pm

पिछली बातों को दोहराकर आगे बढ़ना बहुत जरूरी है 

गलतियाँ फिर न हो पायें ,यह सिखलाना बहुत जरूरी है 

.............बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति मनोज भाई ,..साधुवाद 

Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 12, 2012 at 7:53pm

शुक्रिया आशीष भाई..इस मंच पर पहली बार नुमाया हो रहा हूँ...वह भी अपने प्रिय मित्र वाहिद जी के सहयोग से|आपका आभार|वंदे मातरम

Comment by आशीष यादव on March 12, 2012 at 7:45pm
एक अच्छी रचना। अच्छी सलाह। पढ़कर बहुत अच्छा लगा।
बधाई
Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 12, 2012 at 7:23pm

आपका आभारी हूँ संदीप भाई...जो आपने मुझे एक उम्दा मंच प्रदान किया|वन्देमातरम

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