For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 221 1222 221 1222

 

उसकी ये अदा आदत इन्कार पुराना है

बेचैन नहीं करता ये प्यार पुराना है ।

 

ये हुस्न नया पाया उसने है सताने को

ये जिस्म तमन्नाएं इसरार पुराना है ।

 

अब इसमें नया क्या है बातें हैं गई गुज़री 

रद्दी है कबाड़ा है अख़बार पुराना है ।

 

आते हैं कई ग्राहक मंडी है अमीरों की

कहते हैं मगर इसको बाज़ार पुराना है ।

 

अब कोई दवा इसको आराम नहीं देती

ये शख़्स मुहब्बत का बीमार पुराना है ।

 

इक जंग अजब देखो कोविड ने चला रख्खी 

ये रोग नया लेकिन उपचार पुराना है ।

 

कोई भी सलीक़े से अब रखता नहीं इसको

ये बाप बहुत बूढ़ा लाचार पुराना है ।।

 

मौलिक/अप्रकाशित.

Views: 351

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 13, 2020 at 11:21pm

आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' साहब सादर, प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से धन्यवाद. आपके सुझावों का स्वागत है. किन्तु यहाँ 'कई' की जगह मात्र 'नये' रख देने से बात नहीं बनने वाली है. उसके लिए सम्बंधित मिसरे में 'हर रोज' का भी जिक्र करना पड़ेगा. जो कि संभव नहीं है. इसलिए आपसे सक्षमा मैं यह बदलाव नहीं कर सकूँगा. सादर 

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on June 8, 2020 at 1:11pm

आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले साहिब, इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल पे आपको दाद और बधाई पेश करता हूँ। सभी अशआर बहुत अच्छे लगे। एक शे'र के लिए सुझाव देना चाहूँगा, इस उम्मीद के साथ कि इससे शे'र का भाव नहीं बदल रहा। अगर सुझाव मुनासिब न लगे तो नज़र-अंदाज़ कर दीजियेगा:

आते हैं नये ग्राहक मंडी है अमीरों की

कहते हैं मगर इसको बाज़ार पुराना है 

Comment by Samar kabeer on June 8, 2020 at 11:07am

मेरे कहे को मान देने के लिए आपका धन्यवाद ।

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 7, 2020 at 10:54pm

सादर नमस्कार आदरणीया डिंपल शर्मा जी. प्रस्तुत गज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. सादर 

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 7, 2020 at 10:53pm

जी ! मैंने एडिट कर लिया है आपकी सलाह अनुसार. हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब. सादर नमन.

Comment by Dimple Sharma on June 6, 2020 at 2:45pm

आदरणीय अशोक रक्ताले जी नमस्ते , अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें।

Comment by Samar kabeer on June 6, 2020 at 11:32am

//इक जंग अजब देखो  कोविड ने चला रख्खी//  

अब मिसरा ठीक है ।

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 6, 2020 at 9:24am

आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, गज़ल पर हुए मेरे प्रयास को सराहने के लिए आपका दिल से शुक्रिया. सादर 

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 6, 2020 at 9:23am

आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमस्कार, हार्दिक आभार आपका. बहुत कम ही  होता है जब मैं गज़ल पर प्रयास करूँ.  यहाँ इस गज़ल को पोस्ट करने का कारण आपसे इस्लाह करवाना ही था, क्योंकि बहुत से शब्द ऐसे इसमें आये हैं जो साधारणतः मेरी रचनाओं में नहीं होते हैं तब वर्तनी की त्रुटियाँ होना ही थीं. आपके कहे अनुसार मैंने परिमार्जन किया है. कोविड वाले मिसरे को यूँ कर लिया है // इक जंग अजब देखो  कोविड ने चला रख्खी // कर लिया है. यह ठीक है तो बताएं मैं परिमार्जन कर लूँ. सादर 

Comment by Samar kabeer on June 5, 2020 at 12:07pm

जनाब अशोक रक्ताले जी आदाब,यक़ीन जानिए आप जैसे छंद शास्त्री को ग़ज़ल कहते देख बहुत मसर्रत होती है ।

अच्छी ग़ज़ल कही आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'इक जंग अजब देखो कोविड ने कर डाली'

इस मिसरे की बह्र चेक कर लें ।

'ये जिस्म तमन्नाएं इस्रार

पुराना है'

'इस्रार'--"इसरार"

'अब इसमें नया क्या है बातें हैं गई गुजरी'

'गुजरी'--"गुज़री"

 

'ये इश्क मुहब्बत का बीमार पुराना है'

इस मिसरे में उचित लगे तो 'इश्क़' की जगह "शख़्स" कर लें,क्योंकि इश्क़,महब्बत एक ही बात हुई ।

'कोई भी सलीके से अब रखता नहीं इसको'

'सलीके'--"सलीक़े"

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
" नमस्कार नवीन जी, ग़ज़ल  हुई  है, बधाई स्वीकार करें।  किन्तु मतला  पुन:…"
5 minutes ago
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ0 अनिल कुमार सिंह साहब अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें । "
7 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"गो तंग आ गए हैं मुसलसल ख़िज़ाँ से हम रखते नहीं हैं फिर भी गिला बाग़बाँ से हम वो कहते हैं कि तुम…"
36 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"सुन्दर आयोजन की मुबारक़बाद क़बूल फ़रमाएँ "
44 minutes ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"फिलहाल ग़मज़दा हैं कहें क्या खिजां से हम। क़म्बख्त साँस  उखड़ा है झूले जहाँ  से हम…"
45 minutes ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय आपकी ग़ज़ल अच्छी लगी। शेष गुणीजन मार्गदर्शन देंगे।"
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"ग़ज़लगुज़रे हैं राह - ए - इश्क़ में हर इम्तिहां से हम lफिर भी वफा को पा न सके जान -ए -जाँ से हम…"
1 hour ago
Sanjay Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीया दीपांजलि जी, ग़ज़ल के अच्छे  प्रयास के लिए बधाई स्वीकार करें। १ "तुम तेरा"…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आ. भाई नवीन जी, सादर अभिवादन। कई अच्छे असआरों से सजी गजल से मंच का शुभारम्भ करने के लिए बधाइयाँ…"
3 hours ago
Sanjay Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय नवीन जी, अच्छी ग़ज़ल की बधाई स्वीकार करें। मतला ऊला में रदीफ़ बदल गयी है। २ तिश्नगी और मकान…"
3 hours ago
दिनेश कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"नमस्कार आदरणीय समर कबीर सर। "
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"221        2121       1221       …"
3 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service