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थक चुके हैं आपका हुज़ूर इंतज़ार कर (127 )

ग़ज़ल ( 212 1212 1212 1212 )
थक चुके हैं आपका हुज़ूर इंतज़ार कर
हाल-ए-दिल की आप अब तो आके लीजिए ख़बर
**
किस तरह से एतबार हम दिलाएँ आपकी
याद की शमीम से महकती दिल की रहगुज़र
**
हसरतें मुकाम तक पहुँच सकेंगी क्या कभी
या कि हम बनाएँगे हुज़ूर रेत के ही घर
**
बढ़ गईं हैं दूरियाँ दिलों के बीच बेसबब
क्या समर बिना रहेगा अपने प्यार का शजर
**
मौज में रक़ीब हैं उधर तमाम शह्र के
क्या सबब है बह रही हवा-ए-बे-रहम इधर
**
दिल का दर्द मानिये कि लें समझ उलाहना
दिल से क्या जनाब ने हमें किया है दर ब दर
**
ज़िक्र तो नहीं कभी हुआ कि कुछ हुई ख़ता
कीजिए मुआफ़ आप हो गई ख़ता अगर
**
एक बार आइये हयात में तो लौट के
हल करेंगे साथ मिल के हम गिले तमाम-तर
**
या तो कीजिए करम 'तुरंत' आप अब हुज़ूर
या कि बोलिये इधर न होगी अब कभी नज़र
**
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on February 5, 2021 at 8:04am

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर  

आपकी आनंदित करने वाली सराहना से मन तृप्त हुआ | सृजन सार्थक हुआ | हार्दिक आभार।

 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 5, 2021 at 6:59am

आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

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