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Ratnesh Raman Pathak's Blog – October 2010 Archive (2)

का भाई जी ध्यान बा न ?

का भाई जी ध्यान बा न ?

बड़ा ही अजीब शब्द है,लेकिन आजकल धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है भैया.....ये शब्द मानो लोगो की परछाई बन के चिपक सी गयी है ......जी ये शब्द है चुनावी महाकुम्भ में डुबकी लगाने के वास्ते उतरे हुए उम्मीदवारों के ...राह चलते हुए किसी पहचान वाले को देख लिए तो जल्दी से गाड़ी रुकवाते है ...और हाथ जोड़ते हुए कहते है "का भाई जी ध्यान बा न?" या "का जी बाबा तनी हमरो पर ध्यान देब"

कुछ भी कहा जाये पर बिहार के उन जिलो में चुनावी महापर्व रंग ला रहा है, जहा अभी चुनाव होना बाकि है.… Continue

Added by Ratnesh Raman Pathak on October 29, 2010 at 6:00pm — 1 Comment

आपके दो-चार शब्द .....

सबसे पहले तो मैं ये बताना चाहता हु की क्या आप जानते है की कवियों और कलाकारों को उनके कविता और कला के बदले में क्या मिलता है ?और क्या देना चाहिए?और सबसे अहम् प्रश्न की वे चाहते क्या है ? मैं सबसे पहले इस अहम् प्रश्न का जवाब देना चाहूँगा ,की एक सच्चा कवि और कलाकार अपने मेहनत के बदले न तो आपसे पैसा चाहता है ,न तो आपका दो-चार घंटा समय चाहता है !अगर कुछ चाहता है ,तो वो है आपका प्यार,प्रोत्साहन,सलाह,प्रतिक्रिया -जिसे देने के लिए सिर्फ आपका २ मिनट का समय ही काफी होगा .



जहा तक मेरी अपनी समझ… Continue

Added by Ratnesh Raman Pathak on October 12, 2010 at 4:30pm — 1 Comment

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