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आजकल इस शब्द का क्रेज कुछ इस कदर बढ़ गया है की गावं के चौक चौराहे से लेकर दिल्ली के संसद भवन तक यह शोर शराबे के साथ गूंज रहा है !कोई इस शब्द से अपनी राजनीती के तलवार को धार दे रहा है तो कोई अपनी छवि बचने में जुटा हुआ है !अर्थात अगर साफ़ शब्दों में कहा जाये तो यह भ्रष्टाचार शब्द काफी लोकप्रियता हासिल कर चुकी है साल २०१० में .मैंने अपनी कलम उठाई और सोचा कुछ लिखू इस भ्रष्टाचार पर लेकिन मेरी चल नहीं रही थी.क्योकि मुझे खुद पता नहीं है की यह भ्रष्टाचार है क्या?कुछ सवाल में मस्तिस्क में गूंज रहे थे जैसे:---क्या ललित मोदी द्वारा किया गया आई पी एल घोटाला भ्रष्टाचार है?राष्ट्रमंडल खेल में किया गया करोडों रुपये का घोटाला ही भ्रष्टाचार है?कारगिल में शहीद हुए उन वीर शपुतों के बिध्वाओं को घर आवंटन में किये गए हेर-फेर को ही भ्रष्टाचार कहते है?ए.रजा द्वारा किया गया देश का सबसे बड़ा घोटाला २ जी स्पेक्ट्रुम घोटाला भी भ्रष्टाचार है ?
ऐसे तमाम सवाल मेरे दिमाग में घूम रहे थे .
हलाकि राजनैतिक अस्तर पर देखा जाये तो ये सभी घोटाले देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस से सीधी जुडी हुई है .अगर इन सवालों का विश्लेषण किया जाये तो कुछ ऐसे महापुरुषों के नाम सामने आयेंगे जो आज इस भ्रष्टाचार के स्टार हैं.उदहारण के तौर पर :-ललित मोदी ,सुरेश कलमाड़ी(राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यछ),ए.रजा(पूर्व दूरसंचार मंत्री)अशोक चव्हाण(पूर्व मुख्यमंत्री,महाराष्ट्र).
यह भ्रष्टाचार शब्द सिर्फ स्टार ही नहीं बना रही है ,अब इसका क्रेज संसद में देखिये !
२१ दिवसीय शीतकालीन सत्र इस भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गया.कोई भी कार्य नहीं हुआ इस लोकतंत्र के मंदिर में सिवाय नारेबाजी के.विपछ लगातार संयुक्त संसदीय समिति के गठन की मांग करती रही और सरकार लगातार संसद स्थगन के आड़ में छिपती रही .हलाकि सरकार के पास कोई ठोस जवाब नहीं है की संयुक्त संसदीय समिति का गठन क्यूँ नहीं हो सकता है.?
अब भ्रष्टाचार को आम जनता से जोड़ कर देखा जाये तो ,सवाल यह उठता है की :- पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए दिया gaya १०० या ५०० का नोट,भ्रस्ताचार नहीं है?प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय में आय,जाती,निवास,प्रमाण पत्र निर्गत करने के क्रम में उपयोग होने वाला १० या २० का करिश्माई नोट ,भ्रष्टाचार का भाग नहीं है ?
ऐसे बहुत सारे सवाल है जो सीधे जनता से जुडी हुई है ! राष्ट्रमंडल खेल में कितना घोटाला हुआ ,२ जी स्पेक्ट्रुम में १.७६हजर करोड़ का घोटाला हुआ ,इससे जनता का कोई लें दें नहीं है ,क्युकी यह पैसा उनके जेब से नहीं गया है .अगर यह घोटाला नहीं भी हुआ होता तो उनके रहन सहन पर कोई असर नहीं पड़ता ,और हुआ भी है तो कोई असर नहीं पड़ रहा है.और मेरा मानना है की देश के ५०% गावं के आबादी को तो यह भी पता नहीं है की २ जी स्पेक्ट्रुम है क्या ?
तो अगर ऊपर के सभी लइनो को गौर से ध्यान दिया जाये तो यही kaha जायेगा की अगर २जी,राष्ट्रमंडल,आदर्श हौसिंग,भ्रष्टाचार है तो,जो आम जनता की समस्या मैंने ऊपर दर्शाया है उसे हमारा सिस्टम क्या नाम देगा ?
और अगर यह घुश्खोरी भ्रष्टाचार है तो इन घोटालों को हम महाभ्रश्ताचार क्यूँ न कहें?और यदि ये आम जनता से जुड़े समस्या भी भ्रष्टाचार है तो .........यह भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन केवल दिल्ली में ही नहीं बल्कि प्रखंड स्तर,जिला स्तर ,पर राज्य स्तर पर पर भी उठना चाहिए और इसमें अडवाणी जी का धरना ,रामदेव का भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्टी बनाना ही नहीं बल्कि आम जनता का भी चक्का जाम हो और तब तक रहे जबतक इन भ्रष्ट लोगों को उचित दंड न मिले .
इतने बड़े घोटाले का कीमत सिर्फ इस्तीफे से नहीं चुकेगा .अरबों रुपये का वजन सिर्फ इस्तीफे के एक कागज से नहीं तौला जा सकता है .
जय हिंद !

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