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लघु कथा :- जीवित्पुत्रिका का पर्व

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Comment by Monika Jain on May 3, 2012 at 2:28am

जीवित्पुत्रिका का पर्व " aapki ye laghu katha padne ke baad pida aur prashno se bhar gaya. kyo ham us roz hi kaam band kar dete hia jis roz hame sabse zyada kaam aur karmchariyo ka dhyan rakhna chahiye. hindustani Dharm sachmuch bure waqt aur Khali pet me saath nibhata hai  .


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 1, 2012 at 10:18pm

बहुत बहुत आभार महिमा श्री जी |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 1, 2012 at 10:17pm

सराहना हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा जी, आप सब की प्रेरणा है जो मैं कुछ लिख पाता हूँ |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 1, 2012 at 10:15pm

बहुत बहुत आभार लक्ष्मण प्रसाद जी |

Comment by MAHIMA SHREE on May 1, 2012 at 9:57pm
आदरणीय बागी जी व् आदरणीय धर्मेन्द्र जी को मेरी शुभकामनाये और बधाई/
विशेष कर बागी जी आपकी कथा बहुत ही मार्मिक और यथार्थवादी है हमेशा की तरह ..   
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 1, 2012 at 9:55pm
आदरणीय धर्मेन्द्र जी, सादर
आपकी rachna प्रकाशित होने पर बधाई .
बहुत वास्तविक चित्रण . कामकाजी mahilaon को ghar और दफ्तर दोनों ही देखना होता है. पर साथ बना रहे, सामंजस्य बना रहे. जीवन sukhad एवं aasan हो जाता है. बधाई सुन्दर bhav हेतु.
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 1, 2012 at 9:47pm
आदरणीय बागी जी, सादर
आपकी लघु katha vishayvastu एवं शिल्प के drashtikon से उत्क्रष्ट है. प्रकाशित होने पर बधाई .
आदरणीय तिलक raj जी ने अपनी बात रख दी है.
जब roti नहीं है to vrat to hona hi है, नाम कोई bhi हो. आपने जिस बिंदु पर ध्यान आक्रष्ट करने का प्रयास किया है वो ग्राह्य है. जिस majdoor के लिए दिवस मनाया जा रहा है और उसकी जीविका परतिदिन कमाने से चलती है उसे कानूनन काम करने से रोका जा रहा ये विचार नहीं किया गया ki वो कैसे अपने parivaar की जरूरत को पूरा करेगा. ये कानों बदलना चाहिए या कोई वैकल्पिक व्यवस्था देनी चाहिए. aapko ,आपके ओ.बी.ओ. के विकास हेतु किये जाने वाले प्रयास हेतु punah बधाई.
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 1, 2012 at 8:36pm

जीवित्पुत्रिका-व्रत लघु कहानी वह भी मजदूर दिवस पर,

क्या बात है | हमारा मट्रो अखबार में स्थान पाने पर दो-
गुनी बधाई बागी जी | अन्य सभी महिलाओ को मजदूर 
दिवस पर इस कहानी से  अच्छा सन्देश गया है |

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 1, 2012 at 6:35pm

धन्यवाद आदरणीय अरुण कुमार पाण्डेय "अभिनव" जी |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 1, 2012 at 6:34pm

Very very thanks Respected Bhawesh Rajpal jee for your valuable comment.

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