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हिंदी की कक्षा Discussions (9)

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हिंदी लेखन की शुद्धता के नियम                                         -   डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव

हिंदी लेखन में बड़े लोग भी शुद्ध-अशुद्ध के विचार में प्रायशः चूक जाते हैं i नये लेखकों के तो लेखन का निकष भी यही होना चाहिए की वे कितना शुद्…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

2 May 14, 2021
Reply by Sachidanand Singh

लेखमाला: जगवाणी हिंदी का वैशिऽष्टय् छंद और छंद विधान: 1 --आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल

आत्मीय! वन्दे मातरम. इस विषय पर कुछ सामग्री पहले प्रेषित की थी. उसे संशोधित-परिवर्तित कर पुनः भेज रहा हूँ. कृपया पूर्व सामग्री को निरस्त क…

Started by sanjiv verma 'salil'

9 Apr 20, 2016
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

विशेष लेखमाला: जगवाणी हिंदी का वैशिष्टय् व्याकरण और छंद विधान - 2

विशेष लेखमाला: जगवाणी हिंदी का वैशिष्टय् व्याकरण और छंद विधान - 2   जन-मन को भायी चौपाई  छंद पर इस महत्वपूर्ण लेख माला की प्रथम श्रंखला में…

Started by sanjiv verma 'salil'

8 Feb 5, 2016
Reply by Saurabh Pandey

कर्त्ता और क्रिया के व्यवस्थापक है कारक -- डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव

                       हिंदी शब्द सागर के अनुसार- व्याकरण में संज्ञा या सर्वनाम की उस व्यवस्था को कारक कहते है, जिसके द्वारा वाक्य में उसका…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

2 Jan 27, 2016
Reply by kanta roy

आंग्ल-साहित्य से हिन्दी=साहित्य में आये अलंकारो का सच - डा0 गोपाल नारायन श्रीवास्तव

                   एक समय था जब हिन्दी साहित्य पर पाश्चात्य साहित्य के प्रभाव को लेकर विद्वानों में बड़ी बहस हुयी I यह माना गया कि हिन्दी मे…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

2 Nov 24, 2015
Reply by Dr Ashutosh Mishra

सदस्य टीम प्रबंधन

संयुक्त अक्षरों की मात्रा गणना (आदरणीय संजीव वर्मा 'सलिल' जी से वार्तालाप के आधार पर )

संयुक्त अक्षरों की मात्रा गणना: (आदरणीय संजीव वर्मा 'सलिल' जी से वार्तालाप के आधार पर ) •जब दो अक्षर मिलकर संयुक्त अक्षर बनाते हैं तो जिस…

Started by Dr.Prachi Singh

41 Sep 5, 2015
Reply by Dr.Prachi Singh

अनुनासिक - अनुस्वार समझ मात्र गिनिये मीत:

अनुनासिक - अनुस्वार समझ मात्र गिनिये मीत: संजीव 'सलिल', दीप्ति गुप्ता                                                                   …

Started by sanjiv verma 'salil'

11 Sep 4, 2015
Reply by kanta roy

संस्कृत है अंगरेजी का मूल : संजीव वर्मा 'सलिल'

संस्कृत है अंगरेजी का मूल : संजीव वर्मा 'सलिल' *                     भारत में अ-मृत वाणी संस्कृत को मृत, हिंदी को स्थानीय तथा अंगरेजी को वि…

Started by sanjiv verma 'salil'

8 Sep 4, 2015
Reply by kanta roy

भाषा

भाषा- मानव-समाज के लिए भाषा बहुत महत्वपूर्ण तत्व है। इसके माध्यम से ही मनुष्य विचारों और भावों का आदान-प्रदान करता है। भाषा संप्रेषण का मुख…

Started by बृजेश नीरज

9 Sep 4, 2015
Reply by kanta roy

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चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
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"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
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Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
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Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
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