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मित्रों आप सबके समक्ष है नए सालका नया तोहफा एक नए कोने के माध्यम से| प्रस्तुत है भूले बिसरे गीतों की कहानी " गीत भूले बिसरे"| प्रतिदिन साईट में दाहिनी तरफ परिवर्तित होने वाला यह कोना आप सबको ऐसी पुरानी यादों में ले जायेगा जो मष्तिष्क के किसी कोने में अब भी तरो ताज़ा
हैं| ऐसे गीत जिन्हें जिन्हें ज़माने में उडी धूल की परतों ने धुंधला कर
दिया है, जिन्हें  सुनकर पुराने दिन चोले बदल कर सिरहाने आ बैठते हैं, दिल
के कसी कोने में एक हलचल सी मचाती है| आपकी यादों के इन्ही घरौंदों को बचा
कर रखने की एक कोशिश है " गीत भूले बिसरे"|

*मुख्य पृष्ठ पर स्थान उपलब्ध करने के लिए OBO प्रबंधन को भी बहुत बहुत धन्यवाद|

आशा है आपको यह प्रयास बहुत पसंद आयेगा|

इस कोने के बारे में अपनी प्रतिक्रया से ज़रूर अवगत कराएं|

 

आपका अपना

(राणा प्रताप सिंह)


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बहुत उम्दा शुरुआत .. के लिए बधाई राणा भइया

०9 Jan 11

आज का गीत लता -मुकेश की सदाबहार जोड़ी ने गाया है| फिल्म का नाम है पारस (१९७१), संगीत है कल्याण जी आनंद जी का, कलाकार हैं संजीव कुमार और राखी| एक ख़ास बात यह है कि मुकेश और संजीव कुमार का यह संयोग विरले ही मिलता है| 


प्रस्तुति:- राणा प्रताप सिंह

जी राणा जी बेहद ही सराहनीय प्रयास है ओ. बी .ओ परिवार के सदस्यों को एक बार पुनः इन भूले बिसरे गीतों से रु-ब-रु करने का .बहुत बहुत धन्यवाद

12 Jan ११

साथियों ! गीत भूले बिसरे के क्रम मे आज प्रस्तुत है वहीदा रहमान और देवानंद पर फिल्माई गई १९६५ मे प्रदर्शित फिल्म "गाइड" | इस फिल्म के निर्देशक थे विजय आनंद , संगीतकार एस. डी. वर्मन और गीतकार शैलेन्द्र साहब थे | आज भी जब यह गीत बजता है तो मन मयूर नाच उठता है , लता मंगेशकर की रेशमी आवाज, वाह वाह वाह !

 

१३ Jan ११

साथियों ! गीत भूले बिसरे के क्रम मे आज प्रस्तुत है १९५१ मे बनी गुरुदत्त की फिल्म "बाज़ी" का एक गीत, जिसको अपनी आवाज से सजाया  है महान कलाकारा गीता दत्त ने, संगीतकार है एस. डी. वर्मन और गीतकार है साहिर साहब, तो आप भी सुने और कहे ...... ये कौन आया के मेरे दिल की दुनिया में बहार आई..........

प्रस्तुति:- राणा प्रताप सिंह

१३ Jan ११

१९६१ की फिल्म ससुराल में मोहम्मद रफ़ी को गीत "तेरी प्यारी प्यारी सूरत" के लिए फिल्म फेयर अवार्ड से नवाज़ा गया था प्रस्तुत है उसी फिल्म का एक बिसरा दिया गया गीत, आवाज है मुकेश की संगीत है शंकर जयकिशन का  फिल्माया गया है महमूद और शोभा खोटे के ऊपर| इस फिल्म की खास बात यह है की यह दक्षिण की फिल्म इलारिक्कम की रीमेक थी|  

प्रस्तुति:- राणा प्रताप सिंह
महुवा घटवारिन की प्रेम कथा और मुकेश की मनमोहक आवाज से सजा गीत "दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई ", बहुत ही कम लोगो ने इसे लता जी की आवाज में सुना होगा, तो लीजिये हम लेकर आ गए लता जी की आवाज में "दुनिया बनाने वाले" फिल्म है तीसरी कसम और गीतकार हैं शैलेन्द्र|
Really remarkable post on OPEN BOOK ON LINE.COM by RANAPRATAP SINGH

शास्त्रीय गीतों को गाने में आदरणीय मन्ना डे साहब का जवाब नहीं था, आज प्रस्तुत है उन्ही की आवाज में १९६९ मे रिलीज़ फिल्म तलाश का एक बेहद खुबसूरत गीत...

आज का गीत १९६४ की फिल्म जहाँआरा से है, गायक हैं मखमली आवाज के मालिक तलत महमूद , संगीतकार हैं मदन मोहन और गीतकार हैं राजिंदर कृष्ण

संगीत प्रेमियों ! प्रस्तुत है आज का गीत जो १९७१ मे वी. शांताराम के निर्देशन मे प्रदर्शित हुई फिल्म, जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली का है , गीत लिखे थे मजरूह सुल्तानपुरी ने संगीत दिये थे लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने और स्वर से सजाया था लता मंगेशकर एवं मुकेश ने , एक और खास बात, हिन्दुस्तानी फ़िल्म संगीत मे प्रथम बार इसी फ़िल्म के संगीत मे स्टीरियो फोनिक साउंड का प्रयोग किया गया था| तो सुनिये और महसूस कीजिये संगीत का एक अलग अंदाज .....
राणा जी बहुत प्यारा गीत सुनवाया
धन्यवाद 
"ग़ज़ल" फिल्म के कुछ गीत सुना दीजिये तो मज़ा आ जाये 

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