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Binod Kumar Rai's Discussions (5)

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सदस्य टीम प्रबंधन

"आपकी नज़र.. ना जाने ये दोस्ती कब इबाद्त बन गयी, एक मुलकात मे ही वो मेरी आदत बन गयी.…"

Binod Kumar Rai replied Nov 22, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

"इश्क की दौलत नही मिलती खैरात मे, इसलिये मत बहना जज्बात मे, उसका नाम लोगे तो निकल ही…"

Binod Kumar Rai replied Nov 22, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

"बहूत बहूत धन्यबाद नवीन जी"

Binod Kumar Rai replied Nov 22, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

""हवा करती है सरगोशी बदन ये कांप जाता है मेरा दिल है शिकारी वो जो सबकुछ भाप जाता है.…"

Binod Kumar Rai replied Nov 22, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
Reply by sanjiv verma 'salil'

सदस्य टीम प्रबंधन

""हवा करती है सरगोशी बदन ये कांप जाता है" मेरा दिल है शिकारी वो जो सबकुछ भाप जाता है.…"

Binod Kumar Rai replied Nov 22, 2010 to OBO लाइव तरही मुशायरा-५ (Closed now)

574 Nov 24, 2010
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समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

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