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आज अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ...

मैं महिलाओं और बच्चियों को शुभकामना देती हूँ कि जरूर समाज में जल्दी ही एक साकारात्मक परिवर्तन आएगा, जब पुरुष महिला दो अलग इकाई नहीं बल्कि इस देश के और समाज के बराबर नागरिक होंगे, और घर में भी लड़की लड़के को बराबर दर्जा मिलेगा |

और उनके लिए शुभकामना सन्देश ---

 

वो खिले रहें फूलों की तरह

वो बहा करें खुशबू की तरह

जो चार जुबां होंठों पर चढ़े

छन छन की तरह घुंघुरू से बजें|

 

वो देखे जिधर हरियाली खिले

वो रक्खे कदम खुशहाली बढे

रस सुख का निचोड़ गमक्षार करें

खुशियों में इजाफा हज़ाअर करें |

 

वो नारी ही नहीं वो राम बने

जो बुत बनी हैं उन्हें तार करें|

कोई चीर हरण अब हो न सके

वो खुद के भीतर इक कृष्ण जनें|

 

वो निर्णय का अभिप्राय बनें

और मील का पत्थर उनसे बनें|

वो स्वअभिमान के साथ जियें

आजाद गगन में परवाज भरें |

 

घर की खुशियों का वो सार बनें

और देश जहाँ का सरताज बनें

फिर न सिसकियों की आवाज घुटे

स्त्री पुरुष अब इक साथ चलें |

................. नूतन 

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Comment

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Comment by डॉ नूतन डिमरी गैरोला on March 10, 2013 at 8:11pm
आदरणीय मंजरी जी, राम जी सादर धन्यवाद, आदरणीय सौरभ जी सादर धन्यवाद ,
Comment by ram shiromani pathak on March 9, 2013 at 7:49pm

कोई चीर हरण अब हो न सके

वो खुद के भीतर इक कृष्ण जनें|.. . .

बहुत-बहुत बधाई. .आदरणीया


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 9, 2013 at 1:36am

भावमय उक्तियों से सबल भविष्य के प्रति आश्वस्ति के प्रति आग्रही आपकी यह रचना, नूतनजी, सकारात्मक माहौल को तारी करती है.

इन पंक्तियों ने पूरी रचना सार प्रस्तुत किया है -

कोई चीर हरण अब हो न सके

वो खुद के भीतर इक कृष्ण जनें|.. . .

बहुत-बहुत बधाई. .

शुभेच्छाएँ

 

Comment by mrs manjari pandey on March 8, 2013 at 10:08pm

  काश जल्दी  ऐसा हो जाए धन्यवाद   आपको भी आदरणीया एवं शुभकामनायें आज के  दिवस  की

कृपया ध्यान दे...

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