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है ख़ाक काम किया तूने जिंदगी के लिए।

है ख़ाक काम किया तूने जिंदगी के लिए।
मुनीर जब किया दीया न रौशनी के लिए।

बताई जो मेरी माँ ने वही तो मैं भी कही,
अ़मल कहाँ हुआ बस बात शायरी के लिए।

फ़िराग कब मिली जब ये है जिंदगी झमेला,
नसीब कब हुआ वो चाँद आशिकी के लिए।

ख्याल ढूँढ रखा जो बता सकूँ मैं तुझे,
रखी ये चीज़ जो है खास आप ही के लिए।

ख़ता कभी न हो ऐसा कहाँ लिखा है बता,
तभी हुई है कहानी ये आदमी के लिए ।

फ़जा तलाश जहाँ में कहीं यहाँ या वहाँ,
अ़लील कर रखा दुनिया को आखिरी के लिए।

फ़जा तलाश जहाँ में कहीं यहाँ या वहाँ,
अ़लील कर रखा दुनिया ने आखिरी के लिए।

"मौलिक व अप्रकाशित"

 

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Comment by Samar kabeer on July 25, 2019 at 2:32pm

जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

आपको अभी शिल्प और व्याकरण पर बहुत अभ्यास की ज़रूरत है ।

कृपया ध्यान दे...

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