For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सपने हसीन क्यों होते हैं

स्नेह,दुलार,प्रीत
मिलन,समर्पण
आस, विश्वास  के 
सतरंगी 
ताने बाने से बुने
सपने इस कदर   
हसीन  क्यों होते हैं
कभी मिल जाते हैं 
नींद को पंख
कभी आ जाती है
पंखों को नींद
हम सोते मैं जागते
ओर जागते मैं सोते हैं
सपने इस  कदर  
हसीन क्यों होते हैं
बे नूर आँखों मैं 
नूर जगाते
उदास लबों पर 
मुस्कान खिलाते
मायूस सी ज़िंदगी को
ज़िंदगी का साज सुनाते
सपने इस कदर
 हसीन क्यों होते है
कल्पना के पंख पसारे
जी लेते हैं कुछ पल
इनके सहारे
अँधेरे के आखिरी छोर पर
कौंधती बिजली से यह सपने
इस कदर हसीन 
क्यों होते हैं
जिस पल मेरे सपनों पर
लग जायेगा पूर्ण विराम
मेरी ज़िंदगी के चरखे को भी
मिल जायेगा अनंत  विश्राम
रजनी छाबरा

Views: 835

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by rajni chhabra on May 4, 2012 at 8:40pm

thanx,Mahima for visiting n commenting

 

Comment by MAHIMA SHREE on May 4, 2012 at 4:45pm
जिस पल मेरे सपनों पर
लग जायेगा पूर्ण विराम
मेरी ज़िंदगी के चरखे को भी
मिल जायेगा अनंत विश्राम
रजनी जी नमस्कार
सुंदर अभी व्यक्ति ....बधाई स्वीकार करें
Comment by rajni chhabra on May 4, 2012 at 3:00pm

Thanx,Hemant,kavita kee thaah tak jane ke liye aur aapke sunder comment ke liye

 

Comment by rajni chhabra on May 4, 2012 at 2:59pm

dhanyvad,Rajkumari jee,kavita tak aane aur sarahne ke liye

Comment by hemant kumar thakur on May 4, 2012 at 10:50am

जिस पल मेरे सपनों पर

लग जायेगा पूर्ण विराम
मेरी ज़िंदगी के चरखे को भी
मिल जायेगा अनंत  विश्राम............" bas isliye sapne haseen hote hain.............!! sach sapne haseen hote hain......! sundar kavita rajini ji.... shubhkamana..............

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 2, 2012 at 9:33am

सपने क्यूँ हसीन होते हैं सुन्दर मन की भावाभिव्यक्ति 

Comment by rajni chhabra on April 26, 2011 at 9:55pm
thanx,Dhheaj,aapke is amuly comment ke liye]
Comment by rajni chhabra on April 26, 2011 at 9:54pm
thanx,Abhinv,aapke sashakt comment ke liye
Comment by Dheeraj on April 26, 2011 at 4:22pm
बे नूर आँखों मैं 
नूर जगाते
उदास लबों पर 
मुस्कान खिलाते
मायूस सी ज़िंदगी को
ज़िंदगी का साज सुनाते
सपने इस कदर
 हसीन क्यों होते है
कल्पना के पंख पसारे
जी लेते हैं कुछ पल
इनके सहारे
.......आह वास्तविकता को अपने शब्दों में क्या खूब पिरोया है रजनी जी . यक़ीनन बिलकुल भावनात्मक और सच्ची आधार पे लिखी है अपने ..... सच में जाने सपने क्यों अछे लगते है न हो कर भी अपने लगते है ....... बहुत-२ बधाई
Comment by Abhinav Arun on April 26, 2011 at 3:20pm
जिस पल मेरे सपनों पर
लग जायेगा पूर्ण विराम
मेरी ज़िंदगी के चरखे को भी
मिल जायेगा अनंत  विश्राम
bahut hee maarmik aur sashakt panktiyaan ,kavyitri ko shubhkaamnayen aur badhaaee !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
yesterday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service