For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरी माँ ने झूठ बोल के आंसू छिपा लिया

मेरी माँ ने झूठ बोल के आंसू छिपा लिया
भूखी रह भरे पेट का बहाना बना लिया...

.

सिर पे उठा के बोझा जब थक गई थी वो
इक घूंट पानी पीके अपना ग़म दबा लिया...

.

दिन सारा की थी मेहनत पर कुछ नहीं मिला
इस दर्द को ही अपना मुकद्दर बना लिया...

.

फटे हुए कपड़ों को सीं सींकर है पहनती
ग़मों को फिर आँखों में अपनी छिपा लिया...

.

कब से अकेली जी रही ख़ुद ही के वो सहारे
उसने था तन्हाई को अपना बना लिया...

.

पता था उसे आज भी आया नहीं बापू
तो डाकिया से फिर पुराना ख़त पढ़ा लिया...

.

‘आशू’ अगर इस माँ का अब इक आंसू निकल गया

तो मान लेना तुमने अपना सब गवां दिया...

.
!!अश्वनी कुमार !!
"मौलिक और अप्रकाशित"

Views: 586

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on January 28, 2016 at 2:36pm

भाई अश्विनी कुमार जी, श्री मिथिलेश वामनकर जी ने जो किया वह एक वरिष्ठ जागरुक सदस्य का कर्तव्य था, जिसकी मैं भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूँI यह एक स्वस्थ परंपरा है, जिसका पालन हर ईमानदार लेखक और पाठक को करना चाहिए ताकि साहित्य चोरी पर अंकुश लगाया जा सकेI क्योंकि कल को कोई व्यक्ति आपकी रचना को आपने नाम से प्रकाशित करवाने का प्रयत्न करे तो ऐसी जागरूक और चौकन्नी निगाहें ही उसे पकड़ पाने में सक्षम होंगीI किन्तु उनके द्वारा उठाई गई आपत्ति पर अपना स्पष्टीकरण दिया तो बात शीशे की तरह साफ़ हो गईI लेकिन फिर भी पूर्व प्रकाशित रचना होने के कारण इसे हटाया जाएगाI आश्वस्त रहे, इस परिवार में जानबूझ कर किसी भी सम्मानित सदस्य की शान में कभी कोई गुस्ताखी नहीं की जातीI  बहरहाल, इस मँच पर बने रहना या इसे छोड़ना आपकी निजी पसंद पर निर्भर करता हैI

Comment by Ashwani Kumar on January 28, 2016 at 10:12am

आदरणीय योगराज जी, शायद आप मुझसे ज्यादा अनुभवी हैं और आपको ज्ञान भी मुझसे ज्यादा है. लेकिन शायद आप यह नहीं देख पाए कि समय अंतराल मेरा ही ब्लॉग है और अजमेरनामा.कॉम पर यह पोस्ट मेरे नाम से ही प्रकाशित हुई है. आप देख सकते हैं कि किस दिनांक में यह रचना किसके नाम से और सबसे पहले प्रकाशित हुई है. मैंने इस रचना की चोरी हेतु अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट भी डाला था, क्योंकि यह रचना शायद काफी लोगों को पसंद आई है और शायद इसी कारण नए नए लोगों ने इसे अपने नाम से प्रकाशित कर लिया है. वह कॉपी राईट जैसी किसी चीज़ से शायद अवगत नहीं है और अगर अब भी आपको लगता है कि मेरी सदस्यता समाप्त होनी चाहिए तो आपको जरुरत नहीं है मैं खुद ही ऐसे किसी मंच से नहीं जुड़ना चाहता हूँ जो इस तरह की बातें करते हैं. मिथिलेश जी शायद अब तो आप जान ही गए होंगे... समय अंतराल मेरा ही ब्लॉग है और चोरी के कारण ही इस ब्लॉग से मैंने अपना ट्विटर और फेसबुक पेज भी जोड़ा हुआ है. 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on January 28, 2016 at 9:43am

श्री अश्विनी कुमार जी, इस रचना की मौलिकता के बारे में अगले 24 घंटे तक अपना पक्ष रखें, ऐसा न करने पर आपकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है I


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 28, 2016 at 12:47am

 आदरणीय अश्विन जी, यह रचना पूर्व प्रकाशित रचना है जिसे कई लोगों ने अपने नाम से पोस्ट किया है. आपसे विनम्र निवेदन है कि इस मंच पर केवल मौलिक व अप्रकाशित रचना ही स्वीकार्य है अतः आशा है आप दुबारा ऐसी गलती नहीं करेंगे. सुलभ सन्दर्भ हेतु कुछ लिंक प्रस्तुत है-

http://samay-antraal.blogspot.in/2013/12/blog-post_31.html

http://meriahesas.blogspot.in/2014/03/blog-post_28.html

http://shalusinghlic.blogspot.in/2014/04/blog-post_25.html?view=mag...

http://lavtiwari.blogspot.in/2015/04/meri-maa-ne-jhoot-bol-ke.html

http://ajmernama.com/guest-writer/105238/

https://plus.google.com/+ritikaservi/posts/VpYwsRF1sSV

Comment by TEJ VEER SINGH on January 27, 2016 at 7:34pm

हार्दिक बधाई अश्विन कुमार जी!बहुत सुंदर प्रस्तुति!

आशू’ अगर इस माँ का अब इक आंसू निकल गया

तो मान लेना तुमने अपना सब गवां दिया...

.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Saturday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Saturday
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service