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बादल जब बेज़ार किसी से क्या कहना |
फिर कैसी बौछार किसी से क्या कहना |
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ख़ामोशी, सन्नाटें किस की सुनते है |
बातें है बेकार किसी से क्या कहना |
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बूढ़े पेड़ों पर आखिर क्या गुजरी है |
पढ़ लो बस अखबार किसी से क्या कहना |
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रोते है वाइज़, रोने दो रस्मों को |
कर लो बस यलगार किसी से क्या कहना |
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अपनी छतरी लेकर निकलों राहों में |
बारिश के आसार किसी से क्या कहना |
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जैसे तैसे हम तो खुद को ढो लेंगे |
काँधें जो नाज़ार किसी से क्या कहना |
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दूरी में अब कुर्बत कैसे आएगी |
रिश्तें है बेतार किसी से क्या कहना |
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आदत अपनी जाते - जाते जाएगी |
वो भी है लाचार किसी से क्या कहना |
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महफ़िल में तनहां थे पर खामोश रहे |
कब थे हम दरकार किसी से क्या कहना |
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साहिल से ‘मिथिलेश’ न देखों लहरों को |
जीवन है मझधार किसी से क्या कहना |
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Comment
अच्छी गजल के लिये बधाई |
महफ़िल में तनहां थे पर खामोश रहे |
कब थे हम दरकार किसी से क्या कहना---------------vaah एक और सुन्दर गजल i आपको बधाई i |
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