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" हरामखोर , काम पर ध्यान दे , जब देखो तब बातें करता रहता है " |
जमींदार की लिजलिजी नजर सुखिया पर गड़ी हुई थी , और एक प्रेम कहानी दम तोड़ चुकी थी |

 

मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on September 25, 2014 at 10:44pm

आभार जीतेन्द्र गीतजी ..

Comment by विनय कुमार on September 25, 2014 at 10:43pm

आभार सविता मिश्राजी.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 25, 2014 at 10:34pm

बहुत बढ़िया लघुकथा। बधाई आदरणीय विनय जी

Comment by savitamishra on September 24, 2014 at 11:59am

सुन्दर कहानी

Comment by विनय कुमार on September 23, 2014 at 8:28pm

बहुत बहुत आभार श्याम नारायण वर्माजी..

Comment by Shyam Narain Verma on September 23, 2014 at 10:03am

" अच्छी प्रस्तुति आदरणीय ,बधाई ................. "

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