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नापाक, पाक

हे निर्लज्ज निकर्ष्ठ पडोसी

तुझे कोटि कोटि धिक्कार है

पीठ पर बार करते हो  

यही तुम्हारी हार है

हम सदभावी शांतिदूत

तुम हमें कमजोर आंकते हो

कायर बन चोर की मानद

शरहद क्यों लांघते हो

हमने तुमको भाई माना

गले तुम्हे लगाया है

आँख फेरते ही तुमने

खंजर हम पे चलाया है

जो ऑकात तुम्हारी थी

सब कुछ तुमको दान किया

कश्मीर तुमको मिल जाये

कैसे दिल मै ठान लिया 

लड़ना हो तो सामने आओ

तुम्हारी हस्ती हम मिटा देंगे

पहले भी चटा चुके पुनः धुल चटा देंगें

निर्दोष निहत्थों के हनन मै

मर्दों बाली बात कहाँ

पाक सदैव नापाक रहेगा

अजेय रहेगा हिंदोस्तां

Dr.Ajay.Khare Aahat

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