For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक शक्ति

जागृत हो

आराधना

करनी चाहियें

ईश्वर की

वो बल शक्ति दो

जिससे समस्त

समाज को

हर स्त्री

एक सशक्त

संतान दे

जिसका कर्म

मानव समाज को

समर्पित हो |

तुषार राज रस्तोगी

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 176

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tushar Raj Rastogi on February 19, 2013 at 6:50am

नहीं जी स्त्री से सिर्फ इतनी अपेक्षा है के वो एक संतान उत्पन्न करे और उस संतान को सुसंतान बनाना तो माता और पिता दोनों के हाथ में है | परन्तु वो समय जिसमें संतान गर्भ में रहती है उस समय की नारी की सोच, आचार, विचार और व्यवहार सबका असर शिशु के मन, मस्तिष्क और विकास पर भी पड़ता है तो उस समय एक आशावादी और सकारात्मक सोच का होना अनिवार्य है जो की शिशु के प्राकृतिक स्वाभाव के विकास के लिए बहुत ही आवश्यक है | क्योंकि जीवन को प्राण सिर्फ एक स्त्री ही दे सकती है | यदि पुरुष संतान उत्पन्न कर सकते तो ये बात उनपर भी लागू होती | पर इश्वर ने ये गौरव और हक सिर्फ स्त्री को दिया है इसलिए इसके आगे की बहस व्यर्थ और मिथ्या हो जाती है | बाकि आगे तो जीवन में सबसे ऊपर किस्मत ही चलती है चाहे स्त्री हो या पुरुष |

Comment by Parveen Malik on February 18, 2013 at 11:55am

तुषार जी स्त्री तो संतान पैदा कर देती है लेकिन वो सुसंतान हो इसकी गारंटी भी आप स्त्री से ही चाहते हैं ????

Comment by Tushar Raj Rastogi on February 17, 2013 at 10:14pm

आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया :)

Comment by वेदिका on February 17, 2013 at 6:20pm

यतार्थपरक होना भी कुछ है ... शुभकामनाये।

Comment by Meena Pathak on February 17, 2013 at 5:34pm

सारी अपेक्षाएं स्त्री से ही क्यूँ .....

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on February 17, 2013 at 5:33pm

कामना पुत्र की क्यूँ पुत्री भी महान है 

इश्वर की कृति दोनों सर्व शक्तिमान है 

बधाई, आपकी प्रस्तुति हेतु 

Comment by Tushar Raj Rastogi on February 17, 2013 at 2:11pm

शुक्रिया प्राची जी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 17, 2013 at 10:23am

मानव समाज को सुसन्तति मिले इसकी अपेक्षा सिर्फ स्त्री से...क्यों?

क्या उस शक्ति की ज़रुरत हर इंसान को नहीं जो समाज का अभिन्न अंग है.

यदि समाज को स्वरुप देना सिर्फ स्त्री का ही कर्मक्षेत्र होता तो, उस शक्ति के आह्वाहन की ज़रुरत ही क्यों पढ़ती... जिसे आप स्त्रियों के लिए अह्वाहित करते हैं.

यद्यपि आपकी रचना में इंगित लक्ष्य उचित है, पर कथ्य को और चिंतन और यथार्थपरक होने की ज़रुरत है. 

आपकी और रचनाओं का भी इंतज़ार रहेगा.

शुभेच्छाएं.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Rupam kumar -'मीत' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post उसको भाया भीड़ का होकर खो जाना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. लक्ष्मण जी,ग़ज़ल के प्रयास के लिए बधाई, बह्र-ए-मीर पर ख़ूब शे'र कहे आपने वाह!!"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post जब-जब ख़्वाब सुनहरे देखे - ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, बहतरीन ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ, सादर।"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (न यूँ दर-दर भटकते हम...)
"आ, अमीरुद्दीन साहिब जी, आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई वाह!! चौथा शे'र ख़ूब पसंद आया,  "न जाने…"
3 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ, सालिक सर्, प्रणाम बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है, और दूसरा शे'र क्या ही कहने वाह!! फ़लक पर वो नये…"
3 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- जिन की ख़ातिर हम हुए मिस्मार; पागल हो गये
"धन्यवाद आ. मीत जी, मिस्मार का अर्थ है तहस नहस, छिन्न भिन्न सादर"
4 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ज़िन्दगी भर हादसे दर हादसे होते रहे...)
"आ, अमीरुदीन साहिब जी, आदाब बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही आपने वाह वाह!! मुक़म्मल ग़ज़ल पंसद आई साहिब वाह!! बहुत…"
4 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की- जिन की ख़ातिर हम हुए मिस्मार; पागल हो गये
"आ, निलेश साहिब जी, प्रणाम शे'र दर शे'र दाद पेश कर रहा हूँ। बधाई स्वीकार कीजिए, अच्छी ग़ज़ल…"
4 hours ago
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 2122 1122 1122 22(112)ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा और हँसते हुए दुनिया से गुज़र जाऊँगा…See More
15 hours ago
Shakuntala Tarar replied to Saurabh Pandey's discussion ओबीओ परिवार के युवा साहित्यकार अरुन अनन्त की दैहिक विदाई
"ओह दुखद इश्वर ने इतनी कम आयु क्यूँ दी थी | परिवारजनों को कष्ट देने के लिए | सदर श्रद्धांजलि |"
15 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')
"आ, साहिब ठीक मैं यही कर देता हूँ, आपका बहुत शुक्रिया।"
17 hours ago
Samar kabeer commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')
"'जो सिला मुझको मिला है तुझे सच बोलने से' अभी बात वहीं की वहीं है, इसे यूँ कर सकते…"
17 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post ज़हर पी के मैं तेरे हाथ से मर जाऊँगा (रूपम कुमार 'मीत')
"आ, मोहतरम समर कबीर साहिब, प्रणाम, आपका बहुत शुक्रिया, मेरा इन्तिज़ार ख़त्म हुआ, दिल से शुक्रिया…"
17 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service