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दीया उम्मीद का

 दीया उम्मीद का 

 

इस  प्रछन्न अन्धकार में;

इक दीया मै

उम्मीद का जलाता हूँ,

 और

वहाँ रख देता हूँ;

जहाँ

अँधेरा अभी भी बाकि है,

फिर

इक और दीया

इस उम्मीद से

रौशन करता हूँ:

कोई और भी

इसी तरह से

इक और दिया जलाएगा ;

और

जहाँ-जहाँ तिमिर  पसरा होगा,

वहाँ-वहाँ से वह निकल जायेगा।

और ...और

दीयों की इस श्रृंखला में

पूरा देश दीपोत्सव का त्यौहार

दीपावली हर्ष और आनंद से मनायेगा।

 

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 14, 2012 at 12:14pm

उम्मीद और आशाओं के दीये यों ही जलाती रहिये .. .

शुभ-शुभ

कृपया ध्यान दे...

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