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कविता को समर्पित -कुछ पंक्तियाँ

लोग पूछते है कविता
हमे क्या है, देती
मैं कहता हूँ कविता
हमे क्या नहीं देती
हृदय सबके सादगी देती
नीरस जीवन में ताजगी देती
जीने का मकसद जब, तुझे ना सूझे
जीवन की राह फिर हमे दिखाती
मुहब्बत का पैगाम सुनाती
वीरो की गाथा सुना
कीर्ति उनकी जग फैलाती
संकीर्णता की सरहदे लाँघ
हृदय को विचरण नभ कराती
अमन का सन्देश सुनाती
कल्पना की छलांग लगा
सपनों की दुनिया में, कवि घुमाती
कभी बनाती शीश महल
कभी रंक से राजा बनाती
मर्यादा का पाठ पढ़ा
संस्कारो का बोध करा
कर्मयोगी का गीत सुना
विचारो को हमारे दृढ बनाती
उमंग भर हमारे हृदय ऐसी
विकास के पाठ को सरल बनाती
कविता हमको क्या नहीं देती
अपरिपूर्णता को पूर्ण कराती
दिव्य ज्योति जगा के हृदय
व्यथा का मार्ग अवरुद्ध कराती
अनभिज्ञता को झट मिटाती
कविता हमको क्या नहीं देती

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Comment

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Comment by PHOOL SINGH on September 1, 2012 at 11:04am

अशोक जी प्रणाम,

आपका बहुत धन्यवाद................

फूल सिंह

Comment by Ashok Kumar Raktale on August 30, 2012 at 8:07pm

सच है कविता हमको जोश देती है जब वीर रस हो और मन मुग्ध कर देती है जब यह श्रृंगार रस होती है. बहुत सुन्दर बधाई.

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