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किसके मन में नहीं वेदना

किसके मन में नहीं वेदना
विकल प्राण की धरणी है
कौन प्रतापी धूसर पग से
पार हुआ वैतरणी है ?
किसके मन में ......

कौन विधु परिपूर्ण कला से
गगन खिला अभिराम लला से
कल्‍पवृक्ष यहां किसे मिला है
कौन अमर निर्झरणी है ?
किसके मन में.....

किसके पगतल भंवर नहीं हैं
गुहा-गर्त कुछ गह्वर नहीं हैं
दशो दिशा किसकी पूरब है ?
कौन वृत्‍त विकर्णी है ?

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 14, 2012 at 9:19am

कौन प्रतापी धूसर पग से
पार हुआ वैतरणी है ?..

अभिव्यक्ति आपके प्रति गहन आशाएँ जगाती है. सुझाव और सलाहों के प्रति संवेदनशीलता अत्यंत उपयोगी होगी, राजेशजी. सहयोग बना रहे.

हार्दिक धन्यवाद.

Comment by seema agrawal on August 13, 2012 at 9:57pm

गीत लिखने वालों के साथ अक्सर यह होता है राजेश  जी गीत अमूमन गुनगुना कर ही लिखे जाते हैं बस वही कभी कभी दीर्घ -लघु की गडबड हो जाती है ...मेरे साथ स्वयं यही होता है दूसरों के इंगित करने पर ध्यान जाता है ......मेरी बात को सहजता से लेने के लिए आभार 

Comment by राजेश 'मृदु' on August 13, 2012 at 9:24pm

आप सब का हार्दिक आभार । सीमा जी आपने बिल्‍कुल सही कहा । मैंने कोशिश की थी इसे बदलने की पर किसी कारणवश नहीं बदल पाया, पुन: धन्‍यवाद अपना स्‍नेह बनाए रखें

Comment by seema agrawal on August 13, 2012 at 8:22pm

बहुत सुन्दर भाव पूर्ण गीत राजेश जी बधाई 

किसके मन में नहीं वेदना 
विकल प्राण की धरणी है 
कौन प्रतापी धूसर पग से 
पार हुआ वैतरणी है ?.......वाह बहुत सुन्दर पंक्तियाँ 

पर दो  स्थान इंगित करूंगी जहां मात्राओं के असंतुलन के कारण लघु वर्ण को दीर्घ उच्चारित करना पड़ रहा है 

१)कौन विधु परिपूर्ण कला से/कौन विधू परिपूर्ण कला से

२)कौन वृत्‍त विकर्णी है ?/कौन वृत्‍त वीकर्णी है ?

कल्‍पवृक्ष यहां किसे मिला है....पन्क्ति में मात्राएँ ज्यादा होने के कारण प्रवाह में बाधा आ रही है 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 13, 2012 at 4:35pm

बहुत सुन्दर | यह तो सार्वभौम सत्य है आपने सही कहा है कौन विधु परिपूर्ण कला से 

प्रहावी रचना, हार्दिक बधाई 

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on August 13, 2012 at 3:58pm

//कौन विधु परिपूर्ण कला से
गगन खिला अभिराम लला से
कल्‍पवृक्ष यहां किसे मिला है
कौन अमर निर्झरणी है ?//

वाह वाह बहुत सुन्दर भाव एवं सुन्दर शब्द संयोजन, बधाई स्वीकार करें राकेश कुमार झा जी.

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