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मधुमास दोहावली

शुक्ल पंचमी माघ से ,शुरू शरद का अंत
पवन बसंती है चली, आया नवल बसंत /


ले आया मधुमास है, चंचल मस्त फुहार
पीली चादर ओढ़ के, धरा करे शृंगार /


रात सुहानी हो गई उजली है अब भोर
डाली डाली फूल हैं ,हरियाली चहुँ ओर /


निर्मल अम्बर है हुआ, पाया धरा निखार
जर्रे जर्रे में बसा , कुदरत में है प्यार /


रंग बिरंगी तितलियाँ , मन में भरें उमंग
प्यार हिलोरें ले रहा , अब प्रीतम के संग /


पेड़ आम के बौर से, इतरायें हैं आज
मन को है भाने लगी, कोयल की आवाज /

............मौलिक व अप्रकाशित .......

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Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on February 4, 2014 at 11:32am

अच्छी दोहावली ,  प्रकृति का सुंदर वर्णन , बधाई आदरणीय सरिताजी सुंदर दोहे और इस मास के सक्रिय सदस्य होने की॥

Comment by coontee mukerji on February 4, 2014 at 2:58am

बहुत सुंदर रचना है सरिता जी. आपको सक्रिय सदस्या होने का भी हार्दिक बधाई हो.सादर

कृपया ध्यान दे...

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