For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डूबती इक नाव होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में मुस्कुराती पत्नियाँ।

 

बेसुरा संगीत होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में गुनगुनाती पत्नियाँ।

 

गूंजता अट्टहास होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में  खिलखिलाती पत्नियाँ।

 

मौन सा आकाश होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में गीत गातीं पत्नियाँ।

 

खाली बर्तन जैसे बजती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में टनटनाती पत्नियाँ।

 

बिन मसाला मिर्च होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में सनसनाती पत्नियाँ।

 

कितनी बेआवाज होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में खनखनाती पत्नियाँ।

 

रेंगती रफ़्तार होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में सरसराती पत्नियाँ।

 

बंधा बिस्तरबंद होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में कुरमुराती पत्नियाँ।

Views: 643

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by mohinichordia on February 14, 2012 at 6:17pm

bahut khoob 

Comment by AJAY KANT on February 12, 2012 at 10:42am

Bahut sarahniye pankityan.....

Comment by वीनस केसरी on February 11, 2012 at 10:43pm

बंधा बिस्तरबंद होती आदमी की जिंदगी,

ग़र न होतीं जिंदगी में कुरमुराती पत्नियाँ।

:)))))))))))))))))))))))))

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on February 8, 2012 at 12:17pm
bhabhi ji khush....?
हकीकत दर्शाती शानदार अभिव्यक्ति 
दीपक 'कुल्लुवी'
Comment by Prof. Saran Ghai on February 7, 2012 at 11:55pm

मेरे कवि मित्रों, मेरे पास पत्नियाँ तो और भी बहुत सी किस्मों की हैं यथा: खड़खड़ाती, फनफनाती, धड़धड़ाती, झनझनाती, फ़ुसफ़ुसाती, खटखटाती, बड़बड़ाती और कड़कड़ाती। वो आप सब को मैं एक-एक भेंट करता हूँ। आप अपनी रुची के अनुसार चुन सकते हैं लेकिन उसे घर ले जाने से पहले मेरी तरह सिर के बाल करवाने के लिये तैयार रहें। शुभकामनाओं सहित – प्रो. सरन घई, कनाडा


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 7, 2012 at 11:09pm

अच्छा ! ऐसा !!  .. .  हा हा हा हा .........  :-))

एक और नमूना है, जो आने से रह गया है --’भिनभिनाती पत्नियाँ’ !!!  .. . . 

भाई,  इस हिसाब से तो अच्छा हुआ कि हम ’बहुत कुछ सुनती, फिरभी कुछ नहीं सुनाती’  पत्नी के पत्ना हैं. .. हा हा हा .. .

 

Comment by राज लाली बटाला on February 7, 2012 at 10:06pm
खूब है !! गूंजता अट्टहास होती आदमी की जिंदगी, 
ग़र होतीं जिंदगी में खिलखिलाती पत्नियाँ।  Nice  !! saran bhai !! 
Comment by AVINASH S BAGDE on February 7, 2012 at 8:41pm

san-san...aati patniya

khan-khan...aati patniya

sar-sar...aati patniya

tan-tan... aati patniya.....wah anek rupo me itani sari patniya.....nice rachana Saran bhai. 

Comment by Prof. Saran Ghai on February 7, 2012 at 8:22pm

प्रिय नीरज जी,

अगर वास्तव में इतनी सारी पत्नियाँ मिल गईं तो मैं सारी की सारी रख कर क्या करूँगा, आधी आपको द्दे दूँगा, आप भी क्या याद रखेंगे, किस पत्नी प्रेमी से वास्त पड़ा है।

प्रो. सरन घई


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 7, 2012 at 7:57pm

मुस्कुराती पत्नियाँ

गुनगुनाती पत्नियाँ

खिलखिलाती पत्नियाँ

गीत गातीं पत्नियाँ

टनटनाती पत्नियाँ

सनसनाती पत्नियाँ

खनखनाती पत्नियाँ

सरसराती पत्नियाँ

कुरमुराती पत्नियाँ

,वाह वाह वाह, पत्नियों के इतने सारे रूप, बहुत खूब जनाब, खुबसूरत नज्म की प्रस्तुति पर ढेर सारी बधाइयाँ |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार। पति-पत्नी संबंधों में यकायक तनाव आने और कोर्ट-कचहरी तक जाकर‌ वापस सकारात्मक…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदाब। सोशल मीडियाई मित्रता के चलन के एक पहलू को उजागर करती सांकेतिक तंजदार रचना हेतु हार्दिक बधाई…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार।‌ रचना पटल पर अपना अमूल्य समय देकर रचना के संदेश पर समीक्षात्मक टिप्पणी और…"
2 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर समय देकर रचना के मर्म पर समीक्षात्मक टिप्पणी और प्रोत्साहन हेतु हार्दिक…"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी, आपकी लघु कथा हम भारतीयों की विदेश में रहने वालों के प्रति जो…"
2 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय मनन कुमार जी, आपने इतनी संक्षेप में बात को प्रसतुत कर सारी कहानी बता दी। इसे कहते हे बात…"
3 hours ago
AMAN SINHA and रौशन जसवाल विक्षिप्‍त are now friends
3 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय मिथलेश वामनकर जी, प्रेत्साहन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
3 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Dayaram Methani जी, लघुकथा का बहुत बढ़िया प्रयास हुआ है। इस प्रस्तुति हेतु हार्दिक…"
5 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"क्या बात है! ये लघुकथा तो सीधी सादी लगती है, लेकिन अंदर का 'चटाक' इतना जोरदार है कि कान…"
5 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani जी, अपने शीर्षक को सार्थक करती बहुत बढ़िया लघुकथा है। यह…"
5 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 (विषय मुक्त)
"लघुकथा गोष्ठी" अंक-128 शीर्षक — वापसी आज कोर्ट में सूरज और किरण के तलाक संबंधी केस का…"
7 hours ago

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service