For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Chetan Prakash's Blog – June 2023 Archive (4)

ग़ज़ल

ग़ज़ल

221 2121 1221 212

मदमस्त हम न हों कभी आँखों नमी से हम

सुख दुख रहें खुशी से सदा बन्दगी से हम

हर शख़्स चाहता है ख़ुशी से हो ज़िन्दगी

तस्बीह हो ख़ुदा की बचें हर बदी से हम

हमदर्द बन रहें कभी ज़िन्दा न लाश हों

खुशहाल ज़िन्दगी जियें इन्सान ही से हम

हमको क़सम ख़ुदा की न ज़ालिम का साथ हो

खुशहाल हर कोई कि हर दम नबी से हम

हम भूल कर भी साथ न हों साज़िशों कहीं

जल्लाद हर कहीं हैं…

Continue

Added by Chetan Prakash on June 30, 2023 at 5:06pm — 2 Comments

दिया दिखाते सूर्य को...

दिया दिखाते सूर्य को, बनकर वो कवि सूर ।

आखर एक पढ़ा नहीं, महफिल की हैं हूर ।।

बुद्ध ...पड़े ..बेकार ..हैं, जग की रेलम पेल ।

कि गधों के सिर ताज है, चलते उलटी रेल ।।

नवाँकुरों ..के घर हुई, उस्तादों... से रार ।

आज ग़ज़ल प्राईमरी, मीर भी गिरफ्तार ।।

छूट मिली थी जो चचा , उन्हें नहीं दरकार ।

आँखों ..के ...अन्धे हुए, घर के पहरे दार ।।

ज़ुल्म करते रहे अदब, बदल काफिया…

Continue

Added by Chetan Prakash on June 25, 2023 at 9:30am — 1 Comment

एक ताज़ा गज़ल

22 22 22 22 2

आँगन-आँगन अब धूप खिली है

कि..अंगड़ाई ले ..नदी ..बही है

ओस पत्तियाें हुई सतरँगी है

बसंत, बूँद हीर कनी बनी है

बागों बहार फूल कली आई

ऋुतु बसन्त भी बन वधू बिछी है

लिखा शह्र के भाग्य अभी रोना

गली-सड़क याँ, लू गर्म बही है

तपता तवा सड़क तारकोल की

मुफलिस के घर वो छान पड़ी है

आई क्या गरमी मई - जून की

मौत आम जन सर, आन पड़ी है

बहरा हो गया ख़ुदा…

Continue

Added by Chetan Prakash on June 12, 2023 at 5:26pm — No Comments

कुकुभ छंद आधारित सरस्वती गीत-वन्दनाः

दुर्दशा हुई मातृ भूमि जो, गंगा ...हुई... .पुरानी है

पावन देवि सरस्वती तुझे, कविता-कथा सुनानी है !

दोहा ..सोरठा ..सवैया तज, कवि मुक्त काव्य लिखता है ।

सिद्ध छंद छोड़ काव्य वह अब, भार गिरा कर पढ़ता है ।।

ग़ज़ल उसे बहुत भाती रही, याद ,.,कविता.. दिलानी है ।

कविता का ..मर्म नहीं.. जाने , घुट्टी ..उन्हें ...पिलानी है ।।

पावन देवि सरस्वती तुझे, कविता - कथा.. सुनानी है !

माँ शारदे .. सुन, वरदान दे, दास काव्य का..बन…

Continue

Added by Chetan Prakash on June 1, 2023 at 7:35am — 1 Comment

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आदरणीय, अमित जी आप सही कह रहे हैं। ऐसी अवस्था, सभी, में / पर / पे महर्षि पाणिनी की व्याकरण के…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आ. रिचा जी, अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।"
9 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आदरणीय Aazi जी  बहुत शुक्रिया आपका, मतला सुधार का प्रयास करती हूँ सादर"
9 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आदरणीय लक्ष्मण जी नमस्कार बहुत शुक्रिया आपका सादर"
9 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आदरणीय महेन्द्र जी नमस्कार बहुत शुक्रिया आपका सादर"
9 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आदरणीय शकूर जी  जी शुक्रिया संज्ञान लेने के लिए जी ठीक है सुधार का प्रयास करती हूँ सादर"
9 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आदरणीय अमित जी शुक्रिया इस जानकारी के लिए सादर"
10 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आदरणीय लक्ष्मण जी नमस्कार अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार कीजिये सादर"
10 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"मा’ना बहुत से ऐब हैं इस ख़ाकसार में मा’ना बहुत से ऐब हैं इस ख़ाकसार में लेकिन वफ़ा के गुल…"
10 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"जी ठीक है "
10 hours ago
Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"मज़ार में inside Mazaar मज़ार के अंदर  मज़ार पे/पर  on the Mazaar मज़ार के उपर"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-164
"आ. भाई महेंद्र जी, अभिवादन। उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
11 hours ago

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service