For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Ajay sharma's Blog – December 2014 Archive (6)

मेरी हाथ की वो किताब हो..........

जिसे उम्र भर मैं सुना किया ,

जिसे चुपके-चुपके पढा किया ,

मैं समझ सका न जिसे कभी ,

मेरी हाथ की वो किताब हो ।।



एक बाल था मिरी पलक का ,

जो छुपा रहा मिरी आँख में ,

मुझे जिसकी फिक्र न थी कभी ,

मेरी जिन्दगी का वो ख्वाब हो ।।



जो ठहर गयी मेरी फिक्र थी ,

जो सॅवर गया तेरा ख्याल था ,

जो उतर गयी मेरे दिल के आँगन में ,

वो ठण्डी छॉव हो ।।



तेरे इन्तजार का सिलसिला ,

कभी टूूटता तो मैं जानता ,

मुझे मिला…

Continue

Added by ajay sharma on December 23, 2014 at 10:30pm — 9 Comments

शीत के दुर्दिन का ढो रहे संत्रास , क्या करे क्या न करे फुटपाथ ||

शहरो के बीच बीच सड़कों के आसपास |

शीत के दुर्दिन का ढो रहे संत्रास , क्या करे क्या न करे फुटपाथ || 



सूरज की आँखों में कोहरे की चुभन रही 

धुप के पैरो में मेहंदी की थूपन रही 

शर्माती शाम आई छल गयी बाजारों को 

समझ गए रिक्शे भी भीड़ के इशारों को …

Continue

Added by ajay sharma on December 15, 2014 at 11:10pm — 7 Comments

माँ होती तो ऐसा होता ,..................

माँ होती तो ऐसा होता

माँ होती तो वैसा होता

खुद खाने से पहले तुमने क्या कुछ खाया "पूछा " उसको 

जैसे बचपन में सोते थे उसकी गोद में बेफिक्री से 

कभी थकन से हारी माँ जब , तुमने कभी सुलाया उसको ?

पापा से कर चोरी जब - जब देती थी वो पैसे तुमको 

कभी लौट के उन पैसो का केवल ब्याज चुकाया होता

माँ तुम ही हो एक सहारा

तब तुम कहते अच्छा होता 

माँ होती तो ऐसा होता

माँ…

Continue

Added by ajay sharma on December 14, 2014 at 11:12pm — 9 Comments

मैं हूँ बंदी बिन्दु परिधि का , तुम रेखा मनमानी I

मैं हूँ बंदी बिन्दु परिधि का , तुम रेखा मनमानी I 

मैं ठहरा पोखर का जल , तुम हो गंगा का पानी I I

मैं जीवन की कथा -व्यथा का नीरस सा गद्यांश कोई इक I 

तुम छंदों में लिखी गयी कविता का हो रूपांश कोई इक I 

मैं स्वांसों का निहित स्वार्थ हूँ , तुम हो जीवन की मानी I I…

Continue

Added by ajay sharma on December 14, 2014 at 11:00pm — 14 Comments

पीर पैरों की खड़ा होने नही देती मुझे...............

पीर पैरों की खड़ा होने नही देती मुझे

मेरी देहरी ही बड़ा होने नहीं देती मुझे

फिर वही आँगन की परिधि में बँट गया 

किंतु सीमाएँ मेरी खोने नहीं देती मुझे

उधर पाबंदी ज़माने की हैं हँसनें पे मेरे

इधर दीवारें मेरी रोने नहीं देती मुझे

कर्म के ही हल…

Continue

Added by ajay sharma on December 9, 2014 at 11:00pm — 8 Comments

चित्र हो और कोई , ये गॅवारा नहीं

साथ मेरे चलों , तो चलों उम्र भर ,

दो कदम साथ चलना गॅवारा नहीं।

तुम अधूरे इधर , मैं हूँ अधूरा उधर ,

दोनों आधे जिये , ये गॅवारा नहीं ।

तुम जो कह दो शुरू, तो शुरूआत हो

तुम जो कह दो खतम , सॉस थम जोयगी ।

पंथ कांटों का हो या कि फूलों भरा

तुम नहीं साथ में , ये गॅवारा नहीं ।

लाख नजरों में दिलकश नजारे रहे

किंतु आँखों की देहरी को न छू सके

मेरे सपनों के घर में सिवाय तेरे ,

चित्र हो और कोई , ये गॅवारा नहीं

मैं अकेला रहूँ या रहूँ भीड…

Continue

Added by ajay sharma on December 1, 2014 at 11:00pm — 11 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin posted discussions
10 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव’ अंक 140

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !! ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ चालीसवाँ आयोजन है.…See More
10 hours ago
आचार्य शीलक राम posted a blog post

व्यवस्था के नाम पर

कोई रोए, दुःख में हो बेहाल असहाय, असुरक्षित, अभावग्रस्त टोटा संगी-साथी, हो कती कंगाल अत्याचार,…See More
11 hours ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - मैं अँधेरी रात हूंँ और शम्स के अनवर-से आप

2122 2122 2122 212मैं अँधेरी रात हूंँ और शम्स के अनवर-से आप शाम-सी मुझ में उदासी, सुब्ह के मंज़र-से…See More
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा
"आ. अंजुमन जी, अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा है हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

गीत -६ ( लक्ष्मण धामी "मुसाफिर")

रूठ रही नित गौरय्या  भी, देख प्रदूषण गाँव में।दम घुटता है कह उपवन की, छितरी-छितरी छाँव में।।*बीते…See More
yesterday
Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा

1222 1222 1222 1222अभी बस पर ही टूटे हैं अभी अंबर नहीं टूटा परिंदा टूटा है बाहर अभी अंदर नहीं टूटा…See More
Tuesday
AMAN SINHA posted a blog post

नर हूँ ना मैं नारी हूँ

नर हूँ ना मैं नारी हूँ, लिंग भेद पर भारी हूँपर समाज का हिस्सा हूँ मैं, और जीने का अधिकारी हूँ जो है…See More
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"मिली मुझे शुभकामना, मिले प्यार के बोलभरा हुआ हूँ स्नेह से,दिन बीता अनमोलतिथि को अति विशिष्ट बनाने…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ. भाई सौरभ जी को जन्मदिन की ढेरों हार्दिक शुभकामनाएँ ।।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तिनका तिनका टूटा मन(गजल) - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२२/२२/२२/२ सोचा था हो बच्चा मन लेकिन पाया  बूढ़ा मन।१। * नीड़  सरीखा  आँधी  में तिनका तिनका…See More
Saturday
आचार्य शीलक राम posted blog posts
Saturday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service