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Anita Maurya's Blog – January 2014 Archive (2)

प्रेम गीत

प्रीत की चली पवन,

जब मिले धरा गगन,

मेघों के गर्जन,

संगीत बन गए,

बज उठे नूपुर,

प्रेम गीत बन गए।

कान्हा की बंसी ने

प्रेम धुन बजाई

होके दीवानी देखो

राधा चली आई

अजनबी थे जो,

मन के मीत बन गए,

बज उठे नूपुर,

प्रेम गीत बन गए।

चंद्रमा के प्रेम में,

चांदनी पिघल रही,

बिन तुम्हारे नेह की,

रागिनी मचल रही,

प्रीत में यही,

जग की रीत बन गए,

बज उठे नूपुर,

प्रेम गीत बन…

Continue

Added by Anita Maurya on January 12, 2014 at 10:30pm — 12 Comments

सरस्वती वंदना

हे हंसवाहिनी, हे शारदे माँ, 

विद्या का तू उपहार दे माँ,

जीवन पथ पर बढ़ती जाऊँ, 

अपनों का विश्वास बनूँ माँ, 

अंधियारे को दूर भगा दूँ, 

ऐसी तेरी दास बनूँ माँ, 

तेरी महिमा जग में गाउँ , 

अधरों को तू उदगार दे माँ, 

हे हंसवाहिनी, हे शारदे माँ, 

विद्या का तू उपहार दे माँ,

मधु का स्वाद लिए है ज्यो अब, 

विष का भी मैं पान करूँ माँ, 

फूलों पर जैसे चलती हूँ, 

शूलों को भी पार करूँ माँ, 

तूफानों में राह बना…

Continue

Added by Anita Maurya on January 11, 2014 at 3:00pm — 7 Comments

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"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
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