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भोजपुरी साहित्य Discussions (246)

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हल्की फुल्की हँसी की बात (भाग-६ ) / गनेश जी "बागी"

गुरु जी आज कोलकत्ता से घरे आवत रहलन ह,त छपरा स्टेशन पर मुसाफिर खाना मे बईठ एकमा जाये वाली गाडी के ईन्तजार करत रहलन, बगल मे एक आदमी अउर बईठल…

Started by Er. Ganesh Jee "Bagi"

3 May 20, 2011
Reply by Raju

"चाहेनी तोहके केतना हम कह नइखी सकत"

चाहेनी तोहके केतना हम कह नइखी सकत दूर तोहसे एक पल हम रह नइखी सकत ज़िनगी में त होला बहुते गम मगर गम-ए-जुदाई हम सह नइखी सकत चाहेनी तोहके केतन…

Started by Raju

8 May 20, 2011
Reply by Raju

बतकही ( गपसप ) अंक १

बतकही ( गपसप ) मोड़ पर लछुमन भाई के चाय दुकान पर चार पाच गो लईका, अब लईका कहल ठीक ना कहाई, काहे से कि वो में से दू तीन गो के शादियों हो गइ…

Started by Rash Bihari Ravi

2 May 17, 2011
Reply by Shashi Ranjan Mishra

भोजपुरी के संग: दोहे के रंग -- संजीव 'सलिल'

भोजपुरी के संग: दोहे के रंग संजीव 'सलिल' भइल किनारे जिन्दगी, अब के से का आस? ढलते सूरज बर 'सलिल', कोउ न आवत पास.. * अबला जीवन पड़ गइल, के…

Started by sanjiv verma 'salil'

3 May 16, 2011
Reply by Saurabh Pandey

मिस्टर बिन्देसर अउर महुआ टीवी के परोगराम (भोजपुरी में रूपांतरित पहिला एनीमेशन फिलिम)

अंग्रेजी आ हिंदी में MR. BEAN के अनिमेशन कार्टून के लोग खूब पसंद करेला. एही सोच के हम एह एनीमेशन फिलिम के भोजपुरी भाषा में रूपांतरित कईले ब…

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

1 May 14, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

भोजपुरी दोहे: -- संजीव 'सलिल'

भोजपुरी दोहे: संजीव 'सलिल' * नेह-छोह राखब सदा, आपन मन के जोश. सत्ता धन बल पाइ त, 'सलिल; न छाँड़ब होश.. * कइसे बिसरब नियति के, मन में लगल कच…

Started by sanjiv verma 'salil'

3 May 14, 2011
Reply by Sanjay Rajendraprasad Yadav

तनिका ठहर जा ए पथिक

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

3 May 13, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

कोशिश

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

3 May 13, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

बस तोहरे इन्तेजार में

दिन ढलल आ रात बीतल, दिन हमार कसहु कटल करवट बदल बदल के हमार रात बीतल. बस तोहरे इन्तेजार में. हमार जीवन बन गईल एक अजीब उलझन  तोहर मीत सबका ख…

Started by R. K. PANDEY "RAJ"

2 May 11, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

विधी के विधान (भोजपुरी कहानी )

बरसात के दिन , भादो के अन्हरिया घेरले रहे,  बहरी आकाश मे बदरी लागल रहे | रात भर रामधनी  के उन्घाई ना लागल | करवट बदलत कईसहु समय बितवलन, होत…

Started by Brij bhushan choubey

5 May 2, 2011
Reply by Brij bhushan choubey

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"वाह आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी एक अलग विषय पर बेहतरीन सार्थक ग़ज़ल का सृजन हुआ है । हार्दिक बधाई…"
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सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ

२१२२ १२१२ २२/११२तमतमा कर बकी हुई गालीकापुरुष है, जता रही गाली मार कर माँ-बहन व रिश्तों को कोई देता…See More
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"यह लघु कविता नहींहै। हाँ, क्षणिका हो सकती थी, जो नहीं हो पाई !"
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भादों की बारिश

भादों की बारिश(लघु कविता)***************लाँघ कर पर्वतमालाएं पार करसागर की सर्पीली लहरेंमैदानों में…See More
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दोहा सप्तक. . . . . विविध

मंजिल हर सोपान की, केवल है  अवसान ।मुश्किल है पहचानना, जीवन के सोपान ।। छोटी-छोटी बात पर, होने लगे…See More
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गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
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