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Kailash C Sharma
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चाँद छुप जाओ बादलों में अभी

    चाँद छुप जाओ बादलों में अभी, 

    कहीं ज़माने की तुम्हें नज़र न लगे।

 …

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Posted on September 23, 2011 at 7:00pm — 1 Comment

तलाश खुद की

कितना अच्छा लगता है

कभी खुद से खोकर

खुद को ढूँढना.

 

बीती हुई गलतियों पर

एक निर्पेक्ष दृष्टिपात;

गुजरे रास्तों…

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Posted on September 14, 2011 at 2:30pm — 7 Comments

आकांक्षा

अन्तर्मन में तू रम जाये,

सांस सांस तेरा गुण गाये।

कण कण में तुझको मैं देखूँ,

नज़र पराया कोई न आये।

 

द्वेष न हो कोई भी मन…

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Posted on September 8, 2011 at 2:32pm — 3 Comments

इतना बंदी मत करो मुझे अहसानों से....

इतना बंदी  मत करो मुझे अहसानों से,

कि आखिर को प्रतिदान नहीं मैं दे पाऊँ.

 

विस्मृत अस्तित्व होगया जब मुझसे मेरा,

अहसान तेरे सदियों  के कैसे  याद रहें.

जलने दो जो जलती मुस्कानों की होली,

इतने आंसू मत गिरो, नहीं…

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Posted on September 2, 2011 at 8:00pm — 9 Comments

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At 8:55pm on September 9, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 2:00am on September 2, 2011, monika said…

वाह बहुत खूब जीवन के सच को उजागर करती कविता

At 1:59am on September 2, 2011, monika said…

वाह बहुत खूब जीवन के सच को उजागर करती कविता

At 4:17pm on August 21, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 3:56pm on August 21, 2011, Admin said…

 
 
 

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"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार।"
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"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार। अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न…"
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"आ. भाई गुमनाम जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार।"
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