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क्षणिकाएँ --6 -डॉo विजय शकर

इतने कांटे
कि उनसे बचते-बचते
गुलाब क्या
हर फूल से हम
दूर हो गए .......... 1.

पेड़ कहीं जाते नहीं
फल पक जाएँ
तो रुक पाते नहीं....... 2 .

तुम क्या गये
मेरी तन्हाई
भी ले गये .......…… 3.

और यह भी , यूँ ही,

उनका लिखा शेर खूब चला, खूब चला, खूब चला,
चलना ही था , ट्रक के पीछे जो लिखा था ॥

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Dr. Vijai Shanker on July 16, 2015 at 7:52pm
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी , क्षणिकाएँ आपको पसंद आईं , अच्छा लगा। आपका आभार एवं आपको धन्यवाद।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 16, 2015 at 3:30am

आदरणीय विजय शंकर सर, बहुत ही गहन क्षणिकाएं हुई है. इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 15, 2015 at 11:12pm
आदरणीय सौरभ पांडे जी, आपकी सुरुचिपूर्ण पसंद मायने रखती है , बहुत बहुत धन्यवाद। विलम्ब का कारण यह रहा कि अब की इण्डिया में भयंकर व्यस्तता रही, नेट भी आखिर पंद्रह दिन बंद रहा , उसी भाग-दौड़ में कल हम कोस्टा रीका गए। अब संभवतः समय दे पाउँगा , सादर।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 3, 2015 at 2:08am

क्षणिकाओं के लिए बधाई आदरणीय विजय शंकरजी.  मुझे अंतिम प्रस्तुति मोह गयी.. :-))

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 14, 2015 at 10:40am

आपको क्षणिकाएँ पसंद आईं। आभार. धन्यवाद आदरणीय कृष्ण मिश्रा जी, सादर. 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 14, 2015 at 12:13am

बहुत ही सुन्दर क्षणिकाएँ हुयी है आ. विजय सर! हार्दिक बधाई!

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 12, 2015 at 11:58am

..छोटी बात असर बडा कर गई " बहुत सही कहा आपने , बात असरदार होनी चाहिए.
आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार, आदरणीय सुश्री कान्ता रॉय जी, सादर।

Comment by kanta roy on June 11, 2015 at 10:52pm
बहुत ही सुंदर है यह क्षणिकायें आदरणीय डा. विजय शंकर जी ......छोटी बात असर बडा कर गई । आभार
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 11, 2015 at 8:29pm

आदरणीय विजय निकोर जी, आपका बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद, सादर।

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 11, 2015 at 3:28pm

आदरणीय श्री सुनील जी , क्षणिकाएँ आपको अच्छी लगीं , लिखना सार्थक हुआ.  आपकी प्रशस्ति के लिए ह्रदय से बहुत बहुत आभार, धन्यवाद, सादर. 

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