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बापू की जय(लघु कथा)

-काम हो जायेगा?
-पक्का।
-कोई चूक न हो।
-नहीं होगी भइये।
-पिछली बार हो गयी थी।
-अबकी बार गलती की गुंजाइश नहीं है।
-नजराना भी तो एक कोटि हो गया।
-उफ्फ, महंगाई !क्या करें?मुँह मत खोलना।
-ठीक,पर मेरा लल्ला डी एम हो तो जाये।
-हो जायेगा।बापू की मूर्त्ति के नीचे खड़ा हूँ।झूठ नहीं बोलूँगा।
-राम-राम भाई!
'बापू की जय', बोल दोनों चलते बने।
" मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Manan Kumar singh on December 14, 2017 at 7:15pm

आभार आदरणीय विजय जी।

Comment by vijay nikore on December 14, 2017 at 3:54pm

अच्छी लघु कथा के लिए बधाई, आ० मनन जी

Comment by Manan Kumar singh on December 13, 2017 at 9:23pm

आभार आदरणीया नीलम उपाध्याय जी। 

Comment by Manan Kumar singh on December 13, 2017 at 9:23pm

आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी। 

Comment by Manan Kumar singh on December 13, 2017 at 9:21pm

आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी। 

Comment by Manan Kumar singh on December 13, 2017 at 9:20pm

आभार आदरणीय अजय तिवारी जी। 

Comment by Manan Kumar singh on December 13, 2017 at 1:53pm

आभार आदरणीय राजेश जी।

Comment by Neelam Upadhyaya on December 13, 2017 at 11:57am

आदरणीय मनन सिंह जी, समाज में फैले भ्रस्टाचार पर कटाक्ष करती बेहतरीन रचना । बधाई ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 12, 2017 at 8:43pm

वाह्ह्ह वाह्ह्ह बेहतरीन कटाक्ष करती हुई लघु कथा ..हार्दिक बधाई आद० मनन कुमार जी 

Comment by TEJ VEER SINGH on December 12, 2017 at 7:03pm

हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार जी। बेहतरीन कटाक्ष करती लघुकथा।

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