For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सूरजमुखी - लघुकथा

"मणिधर, ये 'गिफ्ट पैक' 222 नंबर में मैडम को दे आओ।" सिक्योरटी इंचार्ज का आदेश मिलते ही उसके मन में एक विचार कौंध गया था और कुछ क्षण बाद ही वह एक हाथ में 'गिफ्ट' और दूसरे हाथ में चटक लाल रंग का गुब्बारा लिये मैडम के दरवाजे पर था।
बहुत ज्यादा दिन नही हुए थे उसे, इस मल्टीस्टोरी फ्लैटों से सुसज्जित सुंदर सोसायटी में सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी पर आये हुए। आते-जाते लोगों की निगरानी के बीच खाली समय में वह अक्सर फ्लैटों पर अपनी नजरें घुमाया करता था। और इसी बीच सातवें माले के उस कार्नर फ्लैट की बड़ी सी खिड़की के कांच से नजर आती उस बच्ची की गतिविधियाँ उसे आकर्षित करने लगी थी। खिड़की के शीशे से उसके हिलते हाथ और इशारों के बीच, वह उसे अपने बहुत करीब महसूस करने लगा था। सोसायटी गेट के बाहर खड़े गुब्बारे वाले के रंगीन गुब्बारों पर बच्ची की नजरें उसे कई बार बेताब कर देती थी।
"मैम, ये आपका गिफ्ट पैक!" पैकेट को आगे बढाते हुए उसकी नजरें बॉलकनी में खिड़की पर बैठी बच्ची पर जा लगी। "..... और ये बिटिया के लिये 'रेड बैलून' भी!" मैडम की किसी प्रतिक्रिया से पहले ही थोड़ा हिचकिचाते हुये उसने अपनी बात भी पूरी कर दी थी।
"थैंकयू भैया, लेकिन तुम मिन्नी को जानते हो?" व्यवहारिकता दिखाते हुये मैडम थोडा मुस्कराई थी।
"हाँ मैडम जी, हम अक्सर उससे बातें करते है, बहुत प्यारी बच्ची है।" कहते हुये उसके चेहरे पर एक ख़ुशी झलक आई।
"मैं समझी नही!" मैडम के चेहरे पर सहसा एक असमंजस उभर आया।
"जी, दरअसल खाली समय में, मैं खिड़की पर बैठी बिटिया से इशारों से बातें किया करता हूँ और वह अक्सर गुब्बारे वाले की ओर भी इशारा किया करती है। सो आज जब यहां आया तो मैं ये 'लाल गुब्बारा' उसके लिये ले आया।"
"क्या लाल और क्या गुलाबी?" खिड़की पर बैठी बच्ची की ओर देख, एक क्षण को बच्ची की माँ मुस्कराई लेकिन दूसरे ही क्षण उसकी आखों में दर्द उभर आया। "इन रंगो से हमारी मिन्नी को कोई फर्क नहीं पड़ता, उसकी जिंदगी में तो सिर्फ एक ही रंग लिखा हुआ है, 'अँधेरे' का रंग!"
"ये क्या कह रही है आप?" एकाएक गुब्बारा उसके हाथ से छूट गया। उसकी नम होती आँखें, खिड़की के कांच से चिपकी बच्ची पर जा टिकी जो कांच से छनकर आते सूर्य-प्रकाश को अपने चेहरे पर महसूस कर ऐसे आनंदित हो रही थी मानो यही उसका जीवन आधार हो।
विरेंदर 'वीर' मेहता
(मौलिक व् अप्रकाशित)

Views: 1105

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on September 21, 2017 at 4:45pm

कथा पर प्रोत्साहन देती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार कल्पना भट्ट जी, आपकी इस स्स्नेहिल टिप्पणी के लिए शुक्रिया .....कल्पना जी आपने भी भाई उस्मानी जी जैसा ही कुछ प्रश्न पुछा है.... दरअसल 'मणिधर' उस बच्ची के अपने आप मस्त रह कर खेलते हुए और करते हुए इशारे को ही अपनी और का इशारा समझ कर एक काल्पनिक आधार खींच लेता था. इसलिए जब उसे वास्तविकता का गया होता है, तब वह अच्म्भित रह जता है ..... सादर

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on September 21, 2017 at 4:40pm

कथा पर प्रोत्साहन देती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार भाई शेख शहजाद उस्मानी जी.... सूर्य प्रकाश को महसूस करने की बात आपने बिलकुल सही कही भाई उसमानी जी लेकिन रंगीन गुब्बारे को महसूस करने की अनुभूति पर मैं आपको बतान चाहूँगा कि ऐसा कुछ नहीं था दरअसल ये 'मणिधर' के अपने ही भाव थे जो शीशे में से दिखाई देती बच्ची से इशारों से वार्तलाप करके एक काल्पनिक आधार खींच लेता था. बच्ची तो बेचारी अपने ही अंधेरो में मस्त खेला करती थी... सादर.

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on September 21, 2017 at 4:28pm

हार्दिक आभार आदरणीया आशा सिंह जी रचना पर आगमन के लिए .

सादर.

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on September 21, 2017 at 4:27pm

हार्दिक आभार भाई आशुतोष मिश्र जी आपकी स्नेहिल टिप्पणी के लिए... सादर.

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on September 21, 2017 at 4:26pm

भाई अफरोज सहर जी कथा पर प्रोत्साहन देती टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार जी. सादर.

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on September 21, 2017 at 4:25pm

कथा पर प्रोत्साहन देती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार भाई सलीम रजा जी. सादर.

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on September 14, 2017 at 8:08pm
सूर्य प्रकाश को महसूस करता, ग़ुब्बारे बेचने वाले की आवाज़ों से रंगीन ग़ुब्बारों की अनुभूति करता सूरजमुखी बचपन । बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय वीरेंद्र वीर मेहता जी।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 14, 2017 at 5:55pm

इस बेहतरीन लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय वीर जी | एक छोटी सी शंका है , खिड़की से कैसे वह गुब्बारे वाले की तरफ इशारा करती थी , क्या यहाँ यह दर्शा रहे है कि गुब्बारे की आवाज़ से या कुछ और ? कृपया अन्यथा न लेंगे | सादर |

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on September 14, 2017 at 5:51pm

इस बेहतरीन लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय वीर जी | एक छोटी सी शंका है , खिड़की से कैसे वह गुब्बारे वाले की तरफ इशारा करती थी , क्या यहाँ यह दर्शा रहे है कि गुब्बारे की आवाज़ से या कुछ और ? कृपया अन्यथा न लेंगे | सादर |

Comment by आशा सिंह on September 13, 2017 at 8:23pm
बहुत सार्थक

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
Thursday
amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Mar 14
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Mar 13

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service