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ग़ज़ल -कि सरकार भी मोतबर आपकी है-- ( गिरिराज भंडारी )

122  122    12 2    122
जिधर भी मैं जाऊँ डगर आपकी है

हवा मे फज़ा में ख़बर आपकी है


महज़ रात थी आपके हक़ में लेकिन

सुना है कि अब हर पहर आपकी है

 

हरिक पुत्र को मुफ़्त मिलती है ममता

तो, ममता भी अब उम्र भर आपकी है

 

रपट कौन लिक्खे सभी आपके हैं

कि सरकार भी मोतबर आपकी है

 

ज़ियारत करें ना करें आप लेकिन

सियासत पे टेढ़ी नज़र आपकी है

 

नज़ीर आपकी अब मैं दूँ भी तो कैसे

हरी-सावनी सी नज़र आपकी है 


*********************************
मौलिक एवँ अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2017 at 4:37pm

आदरणीय बड़े भाई गोपाल जी , जी समझ गया , सुधारने का प्रयास कर रहा हूँ , आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2017 at 4:36pm

आदरनीय अभिषेक भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2017 at 4:35pm

आदरणीय तस्दीक भाई , सराहना और सलाह के लिये आपका हार्दिक आभार , सुधारने का प्रयास कर रहा हूँ ।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 14, 2017 at 9:33pm

आ० अनुज , आ० तस्दीक भाई की बात में दम हैजब आप हरिक  की बात करते है  तब  -- हरिक काली रात ही चलेगा  , काली रातों नहीं   सादर .

Comment by Abhishek kumar singh on January 12, 2017 at 9:31pm
वाहहहहहह बहुत सुंदर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on January 12, 2017 at 6:57pm

मुहतरम जनाब गिरिराज साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं
शेर 2 के ऊला मिसरे में '' हर इक काली रात '' या '' काली रातों '' देख लीजियेगा --


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 12, 2017 at 5:00pm

आदरनीय मिथिलेश भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।

मै बह्र सुधारा था , उसी समय , और एक शेर और भी जोड़ा था , एडिट करके , लेकिन पता नही क्यों एडिट के बाद वाली गज़ल कैसे प्रकाशित नही हुई , क्यों एडिट हो ही नही पायी  पता नहीं ...   वो शेर भी मेरे पास रिकार्ड मे नही है , क्योंकि मुझे तुरंत सूझा था और वहीं लिख दिया था . सोचा कि बाद मे नोट कर लूँगा ... साइट के बटन आज कल ठीक काम नहीं कर रहे हैं ।

अब फिर से सही बहर लिख दूँगा .....  याद दिलाने के लिये आपका आभार ।

सही बहर -- 122   122   122   122  है


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 12, 2017 at 4:51pm

आदरणीय समर भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका । जी आपने सही कहा , नज़ीर स्त्री लिंग है , सुधार लूँगा , आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 12, 2017 at 4:51pm

आदरणीय समर भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका । जी आपने सही कहा , नज़ीर स्त्री लिंग है , सुधार लूँगा , आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 12, 2017 at 4:50pm

आदरणीय सुशील भाई , ग़ज़ल की सराहना के लिये आपका हृदय से आभार

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