For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अजायब घर में रखा हुआ इन्सान

जब गुजर कर सफ़र से थक जाता हूँ मै
तब तब उस गाँव के पुराने घर जाता हूँ  मै ,

गाँव के आम के  बगीचे में जितना हम तोड़ कर फेंक दिया करते थे
उससे  बहुत कम  इस शहर  में पैसे के बराबर   तौल कर के लाता हूँ में  ..

जब भी मिलता हूँ इस  शहर में किसी से बनकर के अपना
वो कहता है रुकिए अभी दिल बदल कर आता हूँ मै .

हर मोड़ पे अनशन और बंदी ही देखा है इस शहर
और हर कोई कहता है कि रुकिए मै  सता बदलकर  आता हूँ मै ,

जिनके घरों में कुते भी पहनते हैं विदेशों की "टाइयाँ"
 कहते हैं वे  भी कि  देश से प्रेम  है इस लिए खादी पहनकर आता हूँ मै

अपने उसूलों को अब भी मैंने बचा कर के रखा है हमने ,
शायद इस लिए लोग दूर हो जाते हैं जिधर भी जाता हूँ मै ,
लोगों को आदमी नही अजायब घर में रखा हुआ इन्सान नजर आता हूँ मै .

Views: 210

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post रहीम काका - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय मुसाफ़िर जी।"
3 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Veena Gupta's blog post आज का सच
"मुहतरमा वीणा गुप्ता जी आदाब, यथार्थता पर आधारित अच्छी रचना हुई है बधाई स्वीकार करें। सादर। "
15 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post तेरे मेरे दोहे ......
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, मुझे दोहे अचछे लगे, बधाई स्वीकार करें। सादर। "
20 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post क्यों कर हसीन ख्वाब की बस्ती मिटा दूँ मैं- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
23 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हुई कागजों में पूरी यूँ तो नीर की जरूरत - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
25 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-तुम्हारे प्यार के क़ाबिल
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। मुद्दआ पर निलेश जी से…"
30 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मेरी ज़ीस्त की कड़ी धूप ने मुझे रख दिया है निचोड़ कर
"जनाब निलेश शेवगाँवकर जी आदाब, मुश्किल ज़मीन में बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपने, मुबारकबाद पेश करता…"
40 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"जनाब गुरप्रीत सिंह जम्मू साहिब आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।"
1 hour ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on सालिक गणवीर's blog post अब तो इंसाफ भी करें साहिब.......ग़ज़ल सालिक गणवीर
"जनाब सालिक गणवीर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। शे'र नं. 4 पर गुणीजनों से…"
1 hour ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा मुक्तक ......

दोहा मुक्तक .......मन से मन की हो गई, मन ही मन में बात ।मन ने मन को मिलन की, दी मन में सौगात…See More
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Dayaram Methani's blog post ग़ज़ल
""तुम भटक जाओ अगर अनजान राहों में   पथ दिखाने को तुम्हें रौशन सितारा हूँ"  बहुत…"
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - हाँ में हाँ मिलाइये
"आदरणीय निलेश जी आदाब, ख़ास तौर पर मेरे लिए छोटी बह्र में अच्छी तन्ज़िया ग़ज़ल कही आपने, इस ज़र्रा…"
3 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service