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22 22 22 22 22 2
दिल की बात उन्हें समझाना ओ चन्दा
गुजरी कैसे रात बताना ओ चन्दा

छाँव तले तेरी निकलेंगे जब भी वो
मखमल से ज़ज़्बात बिछाना ओ चन्दा

आह भरे ख़ामोशी तन्हा रातों में
सोये हैं अरमान जगाना ओ चन्दा

आयेगा वो मीत जरा शर्मीला है
बदरी बीच तनिक छुप जाना ओ चन्दा

थम जाऊँ मैं हर आहट पे ,चौंक उठूँ
'ब्रज' के सब हालात सुनाना ओ चन्दा

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 568

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 25, 2016 at 11:33am
रचना पटल पे आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं आभार मित्र रोहिताश्व जी
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 22, 2016 at 8:47pm
आदरणीय गिरिराज जी सादर नमन..रचना पटल पे आपकी उपस्थिति उत्साहवर्धक है...
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 22, 2016 at 8:44pm
आदरणीय मिथिलेश जी आपके स्नेह के लिये आपका हार्दिक आभार..
Comment by रोहिताश्व मिश्रा on December 21, 2016 at 8:18pm
Vaah
Bahut pyaari ghazal Brajesh Bhai Ji
Bahut hi pyaari bahr pe

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 21, 2016 at 4:49pm

आदरणीय बृजेश भाई , खूबसूरत रवायती ग़ज़ल के लिये दिली मुबारकबाद ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 20, 2016 at 11:37pm

आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी, बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है,शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं. सादर 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 18, 2016 at 7:03pm
आदरणीय समर कबीर साहब आपके स्नेह और आशीर्वाद के लिए हार्दिक आभार..
Comment by Samar kabeer on December 18, 2016 at 5:38pm
जनाब बृजेश कुमार ब्रज साहिब आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

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