For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक फीलब्दीह/सतविन्द्र कुमार राणा

बह्र:122 122 122 122
-----
नहीं ये किसी को बताया हुआ है
कि इस दिल में तुमको बसाया हुआ है।

रहा जो हमेशा से दुश्मन हमारा
उसे भी गले से लगाया हुआ है।

जमाने को लगने न देंगे खबर भी
खजाना वफ़ा का छुपाया हुआ है।

करम से रहा जो हमेशा ही जालिम
वही अब तो रब का सताया हुआ है।


मुहब्बत वतन से ही ए ‘राणा’ कमायी
तहे दिल से इसको कमाया हुआ है।


मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 735

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 19, 2016 at 8:17am
श्रद्धेय सौरभ पांडेय सर,सादर नमन।आपने इस प्रयास को समय देकर विस्तृत रूप से समीक्षा की उसके लिए मैं दिल से आभार व्यक्त करता हूँ।श्रद्धेय हम ने यानि करता रूप प्रथमा विभक्ति का ही सायास प्रयोग किया था।
अर्थ लिया था हमने ऐसा कुछ भी (किसी को भी) नहीं बताया हुआ है कि तुम्हें दिल में बसाया हुआ है।यहां क्रिया कर्म प्रधान हो रही है यह हमें स्पष्ट हुआ ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए थी।
श्रद्धेय मक्ते में इसे/इसको के प्रयोग से सानी मिसरा कर्म की प्रधानता होते हुए "कमाया" क्रिया रूप भी ठीक नहीं बन पड़ रहा है,इसमें मुझे उलझन हो रही है।आदरणीय रवि शुक्ल जी से इस पर इस्लाह हुई थी।उन्होंने भी यही कहा था कि मुहब्बत स्त्रीलिंग है।पर इसे या इसको के प्रयोग से कर्म वाच्य में होने पर यह ठीक प्रतीत हुआ।तूने शब्द के प्रयोग से पुनः प्रथमा और द्वितीया का फिर घाल-मेल हो गया है क्या ?थोड़ी और स्पष्टता की आकांक्षा है आपसे श्रद्धेय!सादर निवेदन!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 19, 2016 at 7:26am
आदरणीया राजेश दीदी आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 19, 2016 at 7:25am
आदरणीय रवि शुक्ल जी स्नेहिल प्रोत्साहन के लिए तह-ए-दिल से आभार!सादर नमन
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 19, 2016 at 7:24am
आदरणीय समर कबीर साहब,आपकी टिप्पणी सदैव नव ऊर्जा का संचरण करती है।स्नेह और प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन के लिए तह-ए-दिल से आभार।आपका इसारा समझ पा रहा हूँ।सादर
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 19, 2016 at 7:22am
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ भाई जी स्नेहिल प्रोत्साहन के लिए बहुत-बहुत हार्दिक आभार!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 19, 2016 at 7:21am
आदरणीय सुरेश भाई जी अनुमोदन एवं प्रोत्साहन के लिए तह-ए-दिल से शुक्रिया!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 17, 2016 at 6:46am

ग़ज़ल फिल्बदीह हो या सुचारू रूप से सुगढ़ उसकी भाषा को लेकर ठोस नज़रिया रहे. 

नहीं कुछ भी हमने बताया हुआ है ..  में हमने बताया हुआ है जैसा प्रयोग व्याकरण के लिहाज़ से कितना सही है, इस पर अवश्य ग़ौर करें. हमको बताया हुआ है सही प्रयोग होता है. कारण ? कर्ता की दशा. 

मेरे ख़याल से तो रदीफ़ ही टेढ़ा है जिसका निर्वहन इतना सहज नहीं है. फिर ऐसे रदीफ़ के मिसरे पर चलताऊ कोशिश नहीं होनी थी, आदरणीय सतविन्द्र जी. 

इसी शेर को देखें - 

मुहब्बत वतन की तेरे दिल में 'राणा'
इसे ही तो तूने कमाया हुआ है। ....................  ने विभक्ति के बाद क्रिया कर्म के अनुसार होती है. यहाँ मुहब्बत के अनुसार यानी स्त्रीलिंग होनी है. यानी, ’कमायी हुई है’. फिर तूने का प्रयोग भी गलत प्रतीत हो रहा है, यही तुम्हारी कमायी हुई है जैसा वाक्य होना चाहिए जिसे बहर के साँचे में फिट होना चाहिए. 

सुधीजनों से अपेक्षा थी कि मात्र बहर और अरूज़ न देख भाषायी तौर पर भी सुझाव और सलाह दिया करें.

इस शेर के लिए विशेष बधाई - 

रहा जो हमेशा से दुश्मन हमारा
उसे भी गले से लगाया हुआ है।

सादर

 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 16, 2016 at 11:58pm
आदरणीया राजेश दीदी ग़ज़ल प्रयास आपको पसंद आया,यह सार्थक हुआ।इसे सार्थकता प्रदान करने के लिए सादर हार्दिक आभार।सादर प्रणाम दीदी!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 16, 2016 at 11:57pm
आदरणीय रवि शुक्ल जी सादर नमन।आपके स्नेह का सदैव आकांक्षी हूँ।यह स्नेह और मार्गदर्शन यूँ ही बना रहे।सादर हार्दिक आभार!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on October 16, 2016 at 11:56pm
आदरणीय समर कबीर साहब सादर नमन।आपकी टिप्पणी हमेशा ही हौंसले के साथ-साथ इस्लाह से भी युक्त होती है।जो सदैव मेरे लिए काबिले गौर है।आपको यह कोशिश पसन्द आई,यह सार्थक हुई।आपका इशारा मैं समझ पा रहा हूँ।सादर आभार।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
7 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
14 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
yesterday
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय  अखिलेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित "
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय सुशीलजी हार्दिक बधाई। लगातार बढ़िया दोहा सप्तक लिख रहें हैं। घूस खोरी ....... यह …"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Mar 5
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Mar 4
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Mar 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service