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मुक्तिका: ज़िन्दगी हँस के.... ---संजीव 'सलिल'

आज की रचना : मुक्तिका:
:संजीव 'सलिल'


ज़िन्दगी हँस के गुजारोगे तो कट जाएगी.

कोशिशें आस को चाहेंगी तो पट जाएगी..


जो भी करना है उसे कल पे न टालो वरना

आयेगा कल न कभी, साँस ही घट जाएगी..


वायदे करना ही फितरत रही सियासत की.

फिर से जो पूछोगे, हर बात से नट जाएगी..


रख के कुछ फासला मिलना, तो खलिश कम होगी.

किसी अपने की छुरी पीठ से सट जाएगी..


दूरियाँ हद से न ज्यादा हों 'सलिल' ध्यान रहे.

खुशी मर जाएगी गर खुद में सिमट जाएगी..


******************************

दिव्यनर्मदा.ब्लागस्पाट.कॉम

Acharya Sanjiv Salil

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on June 26, 2010 at 12:56am
आचार्य जी के चरणों में सादर प्रणाम
बहुत ही सुन्दर मुक्तिका है
जिन पंक्तियों ने ह्रदय को स्पर्श किया वह ये हैं

रख के कुछ फासला मिलना, तो खलिश कम होगी.
किसी अपने की छुरी पीठ से सट जाएगी..

दूरियाँ हद से न ज्यादा हों 'सलिल' ध्यान रहे.
खुशी मर जाएगी गर खुद में सिमट जाएगी..

सादर

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