For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बाज आता नहीं सिखाने से-ग़ज़ल

2122 1212 22

जाके कह दीजिए ज़माने से
वक़्त छीने कमाने खाने से

यूँ समस्याएं खत्म क्या होंगी
सिर्फ़ इल्ज़ाम भर लगाने से

काम सरकार ग़र नहीं करती
किसने रोका है कर दिखाने से

बैठ टेली विज़न के आगे यूँ
दिन बहुर जाएगा न गाने से

खुद को बदले बिना न रुक सकता
पाप बस शोर यूँ मचाने से

मुद्दे ऐसे तो हल नहीं होंगे
राग-ढपली अलग बजाने से

देश खुद ही प्रगति के पथ होगा
भार हर एक के उठाने से

मानता ही नहीं कभी पंकज
बाज आता नहीं सिखाने से

मौलिक अप्रकाशित

Views: 754

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 9, 2016 at 7:28pm
आदरणीय गिरिराज सर बहुत बहुत आभार
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 9, 2016 at 7:28pm
आदरणीय सौरभ पांडेय सर सादर आभार
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on September 9, 2016 at 7:28pm
आदरणीय सुरेश जी सादर आभार

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 1, 2016 at 9:53pm

आदरणीय पंकज भाई , बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है , हार्दिक बधाई आपको


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 29, 2016 at 6:50pm

बढिया कोशिश हुई है। बधाई स्वीकारिये।

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on August 29, 2016 at 6:21pm
आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा जी इस खूबसूरत गजल पर हार्दिक बधाई प्रेषित है । सादर ।
Comment by Samar kabeer on August 29, 2016 at 2:32pm
जी,ये ठीक है ।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 29, 2016 at 11:24am
फिर बाऊ जी कहूँगा
Comment by Samar kabeer on August 28, 2016 at 10:59pm
भाई आपकी मुहब्बतों का बहुत बहुत शुक्रिया,इस के अलावा आप ओबीओ पर देखेंगे कि सब गुरु हैं और सब चेले ,मेरी गुज़ारिश है कि आप अगर ये तख़ातुब नहीं रखना चाहते तो कोई और रख लें,लेकिन गुरू जी न कहें ,यहाँ हम सब एक परिवार की तरह हैं,और एक परिवार में जो रिश्ते क़याम हो सकते हैं वही रहना चाहिये ।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 28, 2016 at 9:05pm
आदरणीय रक्ताले सर प्रणाम। आप लोगों का स्नेह मुझ पर यूँ ही बना रहे बस, आगे मैं कुछ अच्छी गज़लों का वादा करता हूँ, आशीर्वाद दीजिये कि वादा निभा पाऊँ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
48 minutes ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
3 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
4 hours ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
4 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
4 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
4 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
4 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"प्यादा एक बिम्ब है जो समाज के दरकिनार लोगों का रूप है। जिसके बिना कोई भी सत्ता न कायम हो सकती है न…"
4 hours ago
आशीष यादव commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश जी नमस्कार । बढ़िया छंद रचा गया है।  हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय सुशील जी, जीवन के यथार्थ को दिखाते दोहे बेहतरीन बने हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
5 hours ago
आशीष यादव commented on vijay nikore's blog post प्यार का पतझड़
"कुछ चीज़ों को जब कहना मुश्किल हो जाता है तब वह कविता बनकर सामने आ जाती है। एक बेहतरीन कविता पर बधाई…"
5 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक भावपूर्ण मर्मस्पर्शी कविता पर आपको बधाई।  आदरणीय Saurabh Pandey जी की टिप्पणी ही इस कविता…"
5 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service