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महीन रेशम की डोरी है ये.

mere dost sankalp sharma ki sagaye pe kuch bhav vyakat karne ki koshish mai ye gahzal huee hai. umeed hai aapko pasand ayegi ..

---

महीन रेशम की डोरी है ये, ना ज़ोर इस पे तुम आज़माना
जहाँ ज़रूरत हो जीतने की, बस यूँ ही करना तुम हार जाना

न देखना एक दूसरे को...... भले ही आँखों मे प्यार क्यूँ हो
जो देखना हो, वो साथ देखो बस इक तरफ ही नज़र उठाना

कभी जो जाओगे बृंदावन तो बुलाना राधा ही राधा उसको
कन्हिया जो हो कहाना खुद तो, हां कान्हा जैसे नज़र भी आना

नज़र से करना नज़र की बातें..लबों को रखना लबों की खातिर
सवाल जो हो, जवाब वो हो.. जहाँ हो जिसकी जगह बिठाना

स्याही उसकी कलम भी उसका हो 'फ़िक्र' भी और ब्यां भी उसका
उसी की बातें उसी से करना, हमें भी उसकी ग़ज़ल सुनाना

--

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Comment

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Comment by vikas rana janumanu 'fikr' on May 16, 2011 at 10:15am

shukriyaa abhinav bhayeee

shukriyaa

Comment by vikas rana janumanu 'fikr' on May 16, 2011 at 10:14am
baagi bhayeee............ aapne to bahut badi umeed laag li humse, sahityaa kahaN hum kahaN .............
fan salamat rahe, fankaar to aate jate rahte haiN
Comment by vikas rana janumanu 'fikr' on May 16, 2011 at 10:13am
@vandnaa ji thanks lot , padhle aur sarahne ke liye :)
Comment by vikas rana janumanu 'fikr' on May 16, 2011 at 10:13am
shukriyaa kamal ji ....................aapki dua hai
Comment by vikas rana janumanu 'fikr' on May 16, 2011 at 10:12am

@ rana prtaap ji...........
shukriyaa padhne ke liye aur comment karne ke liye ///

 

Comment by Abhinav Arun on May 15, 2011 at 10:05pm
 बहुत खूब पौराणिक आख्यानों की खूबसूरत बयानी वाह !! बड़ी नाज़ुक ख़याल दाद कबूलें इस अंदाज़ पर !!

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 15, 2011 at 9:58pm
विकास भाई , क्या कहे इस ग़ज़ल पर मतले से लेकर मकते तक बड़ी खूबसूरती से सवारा है आपने , बहुत दिनों के बाद ओ बी ओ पर पुनः आपको पढने को मिला बहुत ही अच्छा लगा, युवा फनकारों को पढ़ ऐसा लगता है की साहित्य का भविष्य बहुत ही उज्वल है | दाद कुबूल करे भाई | 
Comment by कमल वर्मा "गुरु जी" on May 15, 2011 at 1:27pm
वाह फ़िक्र भाई बहुत बढ़िया सोंच है आपकी ........

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on May 14, 2011 at 9:07am

फिक्र साहब ..बहुत खूब 

 


न देखना एक दूसरे को...... भले ही आँखों मे प्यार क्यूँ हो
जो देखना हो, वो साथ देखो बस इक तरफ ही नज़र उठाना

 

आपके दोस्त को हमारी तरफ से भी मुबारकबाद|

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