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इश्क़ में इनकार भी इकरार भी (ग़ज़ल 'राज' )

2122  2122  212

 

जिंदगी में जीत भी कुछ हार भी

और यारो प्यार भी तकरार भी  

 

लोग दरिया  से उतारें पार भी     

छोड़ देते बीच कुछ मजधार भी

 

हर कदम पे ही मिले हमको सबक

राह में कुछ फूल भी कुछ ख़ार भी

 

हम भले फुटपाथ पर धीमे चले

पार करने को बढ़ी रफ़्तार भी

 

जो मिले पैसे उसी में सब्र था 

 बीस आये हाथ में या चार भी

 

हम सदा खेला किये बस गोटियाँ

खेल में खंजर मिले तलवार भी

 

जिन्दगी ने सब लिए हैं इम्तहाँ

इश्क़ में इनकार भी  इकरार भी

 

जीस्त तो कुरआन गीता की तरह  

पर कभी दर पे पड़ा अखबार भी

 

इस चमन में हर तरह के फूल हैं

ढूँढ लो खुद्दार भी गद्दार भी

मौलिक एवं अप्रकाशित 

 

Views: 639

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 21, 2016 at 11:46am

आदरणीया राजेश जी , बहुत अच्छी ग़ज़ल  कही आपने , दिल से बधाइयाँ आपको ।

लोग दरिया  से उतारें पार भी      --  दरिया के पार  या दरिया के पार  , मुझे के सही लग रहा है , सोचियेगा ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 21, 2016 at 10:12am

आ० डॉ० सूर्या बाली जी,ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और दाद दोनों के लिए दिल से बहुत बहुत आभार .  

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 20, 2016 at 10:04pm
हर क़दम पे ही मिले हमको सबक़ ...
राह में कुछ फ़ूल भी कुछ खार भी ...
हासिल ए ग़ज़ल शेर
वैसे तो पूरी ग़ज़ल ही बेहतरीन है
बहुत बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 20, 2016 at 8:49pm

तहे दिल से आभार आ० मनन कुमार जी 

Comment by Manan Kumar singh on June 20, 2016 at 8:46pm
बहुत खूब हालाते-बयां,बधाई।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 20, 2016 at 7:39pm

आ० तेजवीर सिंह जी बहुत- बहुत शुक्रिया |

Comment by TEJ VEER SINGH on June 20, 2016 at 2:03pm

हार्दिक बधाई आदरणीय राजेश कुमारी जी! बेहतरीन  गज़ल!

जिन्दगी ने सब लिए हैं इम्तहाँ

इश्क़ में इनकार भी  इकरार भी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 20, 2016 at 11:43am

आ० श्याम नारायण जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by Shyam Narain Verma on June 20, 2016 at 11:08am

इस चमन में हर तरह के फूल हैं

ढूँढ लो खुद्दार भी गद्दार भी

शानदार रचना आदरणीया बहुत२ बधाई   आप को | सादर 

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