For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

165
ये गठरी!
======

ये गठरी!
कब होगी हलकी,
परायों के समानार्थी,
अपनों के कर्ज से छलकी!

मूलाॅंश को पटाने की
योजना बनाई मैंने,
तत्क्षण,
अपनी अपनी व्याज दर बढ़ाई इन्होंने।
जिंदगी की रेलगाड़ी,
कभी पा न सकी पटरी!

कुछ लोग,
सुखपूर्वक जीते हैं,
कर्ज लेकर भी घी पीते हैं!
और,
चुकाने के नाम पर---
देते हैं धमकी!

सुख! क्या है?
क्या पता।
घर! क्या है?
नहीं सकता बता।
किराये की जिंदगी,
जगह जगह अटकी।

हर साॅंस !
बंधाती है यही आस,
आयेगा कोई क्षण,
जब बुझेगी प्यास....
अभी तो,
अश्रुसागर में में ही लगा डुबकी।

3 जुलाई 2006
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 495

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr T R Sukul on April 27, 2016 at 10:20pm

आदरणीय सुशील  सरना जी , रचना की प्रशंसा करने के लिए विनम्र आभार। 

Comment by Sushil Sarna on April 27, 2016 at 7:41pm

सुख! क्या है?
क्या पता।
घर! क्या है?
नहीं सकता बता।
किराये की जिंदगी,
जगह जगह अटकी।

बहुत सुंदर आदरणीय टी आर शुक्ल जी .... यथार्थ का आईना दिखाती इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई सर।

Comment by Dr T R Sukul on April 27, 2016 at 5:06pm

आदरणीय मिथिलेशजी , रचना को पसंद करने के लिए विनम्र धन्यवाद। 

Comment by Dr T R Sukul on April 27, 2016 at 5:06pm

आदरणीया रजेशकुमारी जी , रचना पर उपस्थित होकर अपनी सार गर्भित टीप से उसे सुसज्जित करने के लिए विनम्र आभार। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 26, 2016 at 11:34pm

आदरणीय शुक्ल जी, इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई निवेदित है. सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 26, 2016 at 9:23pm

ये गठरी! 
कब होगी हलकी,
परायों के समानार्थी,
अपनों के कर्ज से छलकी!

मूलाॅंश को पटाने की
योजना बनाई मैंने,
तत्क्षण,
अपनी अपनी व्याज दर बढ़ाई इन्होंने।
जिंदगी की रेलगाड़ी,
कभी पा न सकी पटरी!---वाह्ह्ह  अपनों के लिए जीवन भर पिसता रहता है इंसान कितना भी करे उनकी अपेक्षाएँ बढ़ती ही रहती हैं मन के अंतर्द्वंद को बहुत सार्थक शब्द मिले हार्दिक बधाई इस सुन्दर प्रस्तुति पर आ० सुकुल जी 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
11 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service