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"इंसान"
पुरानी हवेली में छिपे आंतकियों पर सैनिक कार्यवाही की कवरेज का आदेश मिला था उसे और वो रात के घने अँधेरे में रह रह कर होने वाली फायरिंग के बीच कुछ लाइव शूट करने की कोशिश में लगा था जब उसकी नज़र किसी औरत के साथ भागने की कोशिश करते एक आंतकी पर पड़ी। और अगले ही क्षण उसकी लाइट और कैमरे की क़ैद में आने के साथ ही वो आंतकी सैनिको की गोली का शिकार हो गया। साथ वाली औरत के चीख कर जमीन पर गिरने की आवाज पर वो और सचेत हुआ और अपना कैमरा संभाल किसी तरह उस तक पहुंच गया।
एक प्रसव वेदना से कराहती औरत उसके सामने थी। मामला नाज़ुक हो गया था उसने फौरन सहयोगी को मीडिया वैन पास लाने का आदेश दिया।......
"उसे छोड़ो वहीँ, टार्गेट बाकी के आंतकियो पर रखो।" कण्ट्रोल रूम से आदेश मिला।
"सर। 'उसे' सहायता की तत्काल जरूरत है।" उसने अपना पक्ष रखना चाहा।
"तुम मीडिया की डयूटी पर हो और अपना काम करो।" आदेशत्मक आवाज सख्त हो गयी।
लेकिन कुछ ही क्षण में मीडिया वैन प्रसूता को लेकर अस्पताल की ओर दौड़ रही थी। उसके निर्णायक शब्द कण्ट्रोल रूम में मिसाल बन कर गूँज रहे थे।
"सॉरी सर। 'मीडिया' अपना काम कर चुका है अब बारी एक इंसान की है और 'वो' अपना काम पूरा करने जा रहा है।
(मौलिक और अप्रकाशित)
विरेंदर वीर मेहता

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Comment by मिथिलेश वामनकर on November 12, 2015 at 11:23pm

आदरणीय वीरेंदर जी बढ़िया लघुकथा हुई है हार्दिक बधाई 

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on November 11, 2015 at 7:05pm
आदरणीय विजय निकोरे जी अजय कुमार शर्मा जी सुनील वर्मा जी शेख शहज़ाद भाई और सुश्री कल्पना भट्ट जी, और राहिला जी। आप सभी गुणीजनों की सकारत्मक प्रतिक्रिया और कथा पर अपना मूल्यवान समय देकर हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए मैं तहे दिल से आभारी हूँ।
सादर आभार के साथ साथ आपको दीवाली की भी हार्दिक बधाई स्वीकार करे। सादर।
Comment by vijay nikore on November 11, 2015 at 12:52pm

लघुकथा सुन्दर बनी है। हार्दिक बधाई।

Comment by Ajay Kumar Sharma on November 10, 2015 at 11:43pm

उत्तम रचना। वीरेन्द्र जी सादर बधाई स्वीकार करें।

Comment by Rahila on November 10, 2015 at 1:29pm
बहुत सार्थक लेखन और बहुत बेहतरीन रचना । आदरणीय वीरेन्द्र जी! तहे दिल से बधाई स्वीकार कीजिये ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 10, 2015 at 1:11pm
बहुत सुंदर सार्थक प्रेरक प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय वीरेन्द्र वीर मेहता जी।

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