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बन्दे में है दम !

बन्दे में है दम और हम भी खड़े हैं संग,
ये   ललकार  तुम  तक  पहुंची  है जब,
अब तो सांस लेंगे शुद्ध, नहीं चैन है अब,
बन्दे में है दम और हम भी खड़े हैं संग,

नेता पूंछे हे प्रभु  अब ये  कैसी  है  जंग,
प्रभु कहें बच्चा करम का फल संग संग,
अब तो उड़ा है गुलाल श्वेत जिसका रंग,
बन्दे में है दम और हम भी खड़े हैं संग,

अब घड़ी आई हमारी जाने दुनिया सारी,
दुनिया ने देखा एक और अहिंसा पुजारी,
परिणाम  देख  कर सारी दुनिया है  दंग,
बिना अस्त्र - शश्त्र  के  ये कैसी थी  जंग,
बन्दे में है दम और हम भी खड़े हैं  संग,

आगे  कि  लड़ाई तो अभी है  बहुत ही भारी,
अंत नहीं  हुआ  भविष्य  मे भी रहेगी जारी,
अभी  तो ये  प्रथम चरण  कि थी मूक जंग,
आगे आगे देखिये  इस पर कैसा चढ़ेगा रंग,
बन्दे  में है  दम  और  हम  भी खड़े हैं  संग,

अन्ना हजारे जी  और सभी जन सहयोगियों को समर्पित ये पंक्तियाँ !
राजीव

जय हिंद!

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Comment

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Comment by Rajeev Mishra on April 11, 2011 at 7:50pm
हर्दिक धन्यवाद गणेश भाई जी , अरुण भाई जी !

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 9, 2011 at 10:25pm

अब घड़ी आई हमारी जाने दुनिया सारी,
दुनिया ने देखा एक और अहिंसा पुजारी,
परिणाम  देख  कर सारी दुनिया है  दंग,
बिना अस्त्र - शश्त्र  के  ये कैसी थी  जंग,
बन्दे में है दम और हम भी खड़े हैं  संग

 

बहुत खूब राजीव जी , अच्छी रचना , अहिंसा आज भी उतना ही सामयिक और असरदार है , बधाई इस प्रस्तुति पर |अन्ना जी का प्रयास रंग लाया |

Comment by Abhinav Arun on April 9, 2011 at 3:31pm
सलाम अन्ना जी और आपकी इस सुन्दर रचना दोनों को !!

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