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अधूरी इच्छा (लघुकथा)

बाबूजी जी के श्राद्ध कर्म में वे सारी वस्तुएं ब्राह्मण को दान में दी गयी जो बाबूजी को पसंद थे. शय्या-दान में भी पलंग चादर बिछावन आदि दिए गए. ऐसी मान्यता है कि स्वर्ग में बाबूजी इन वस्तुओं का उपभोग करेंगे. लोगों ने महेश की प्रशंशा के पुल बांधे।

"बहुत लायक बेटा है महेश. अपने पिता की सारी अधूरी इच्छाएं पूरी कर दी."
"पर दादाजी को इन सभी चीजों से जीते जी क्यों तरसाया गया?"- महेश का बेटा पप्पू बोल उठा.

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(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 7, 2015 at 7:39pm

आदरणीय गिरिराज जी आपने गिरि गंभीर गिरा से ग्रहणीय शेर को अर्ज किया ...आदाब अर्ज है बहुत बहुत आभार!

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on July 7, 2015 at 3:15pm

लोंक लाज वश , अधूरी इच्छा पूर्ण करनी होती है , बुजुर्गों का जीवन भले ही नर्क कर दिया हो पर मरने के बाद बेटा स्वर्ग जरुर दिलाता है पंडित का पेट भर कर . 

लघु कथा के माध्यम से समाज में चेत्नना जागृत करने के प्रयास को नमन . आदरणीय सिंह साहब जी , सादर 

Comment by kanta roy on July 7, 2015 at 1:39pm
दादा जी के कमरे में शायद टुटी खाट अब भी पडीं होगी कोने में , दीवारों में सिसकियां छुपी होगी उनकी अभी भी .. तंग दिल बच्चों को कहाँ फुरसत रही होगी उन ममता को पोषण देने के लिए .... आज वक्त आन पडा़ है अपने रूतबे को जग जाहिर करने का .... सो खुलकर रूतबा दिखा रहे है । लघुकथा अच्छी बनी है आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी ... पंच यहाँ और तेज हो सकता था । हालांकि मै स्वंय सीखने में प्रयत्नशील हूँ अभी , इसलिए यह सिर्फ मेरा एक विचार हो सकता है ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 7, 2015 at 11:21am

बहुत खूब , आदरणीय  यही हो रहा है , हार्दिक बधाई , प्रतिक्रिया मे अभी कही गज़ल का शे र देना चाहता हूँ  ---

रहा जब तक सुनी तुमने नहीं,  जिस शख़्स की यारो

लिपट कर आज रोना क्यूँ , कि वो उत्तर नहीं देता ॥  

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 6, 2015 at 8:09pm

आदरणीय मोहन सेठी जी, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 6, 2015 at 8:08pm

आदरणीय मिथिलेश जी, आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 6, 2015 at 8:06pm

उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीया परी जी !

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 6, 2015 at 8:05pm

उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आदरणीय अमन कुमार जी!

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on July 6, 2015 at 7:04pm

सही प्रहार किया आपने दिखावे की दुनिया पर ...बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 6, 2015 at 3:54pm

आदरणीय जवाहर जी बधाई इस संवेदनशील लघुकथा के लिए....

बाबूजी जी के श्राद्धकर्म में वे सारी वस्तुएं ब्राह्मण को दान में दी गयी जो बाबूजी को पसंद थी. शय्या-दान में भी पलंग चादर बिछावन आदि दिए गए.

ऐसी मान्यता है कि स्वर्ग में बाबूजी इन वस्तुओं का उपभोग करेंगे. अतः लोगों ने महेश की प्रशंसा के पुल बांधे।

"बहुत लायक बेटा है महेश. अपने पिता की सारी अधूरी इच्छाएं पूरी कर दी." 
"पर दादाजी को इन सभी चीजों के लिए जीते जी क्यों तरसाया गया?"- महेश का बेटा पप्पू बोल उठा.

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