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ग़ज़ल - फिल बदीह -- खार सीने से लगाता कौन है ( गिरिराज भंडारी )

2122      2122    212 

छोड़िये , हमको बुलाता कौन है

खार सीने से लगाता कौन है

आप हैं गमगीन , खुद रोते रहें

अब यहाँ कन्धा बढाता  कौन है

 

हाथ अंगारों में रख कहते हैं वो

हमसा खुद को आजमाता कौन है

 

सोई खोई बस्ती की तनहाई में

ग़ज़ले-ग़ालिब गुनगुनाता कौन है

  

एक दिन तो खोजिये इस दश्त में

खिलखिलाता , मुस्कुराता कौन है

 

आप भी मायूस हो कर लौटेंगे

पत्थरों से दिल लगाता कौन है

 

चाँद बन तू , पास आयेंगे तभी

सूर्य के नज़दीक जाता कौन है

 

इक न इक दिन हार जाते हैं सभी

ज़िन्दगी को को जीत पाता कौन है

 

पूछ मत बाहर निकल कर देख ले

आसमाँ पर झिल मिलाता कौन है 

 

रोशनी में रोशनी करते हैं सब

आइना तम को दिखता  कौन है

**********************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

 

Views: 990

Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 28, 2015 at 4:33am

ये ग़ज़ल भी कमाल 

और ये शेर  बेमिसाल ---->

चाँद बन तू , पास आयेंगे सभी

सूर्य के नज़दीक जाता कौन है

पूछ मत बाहर निकल, आ देख ले

आसमाँ पे झिलमिलाता कौन है 

फिल बदीह में आप कमाल कर रहे है सर 

दाद ...दाद ...दाद ...दाद ...दाद ...दाद ...दाद ...दाद ...

Comment by Hareram Sameep on June 27, 2015 at 3:58pm

Bahut achchhi ghazal...badhai

Comment by Rahul Dangi Panchal on June 26, 2015 at 9:45pm
बहुत सुन्दर
Comment by Rahul Dangi Panchal on June 26, 2015 at 9:45pm
बहुत सुन्दर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 26, 2015 at 9:23pm

आदरणीय कृष्णा भाई , सराहना और उत्साहवर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 26, 2015 at 9:22pm

आदरणीय धर्मेन्द्र भाई , हौसला अफ्ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया आपका ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 26, 2015 at 9:21pm

आदरणीय विनय भाई , आपका तहे दिल से शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 26, 2015 at 9:20pm

आदरणीय वीनस भाई , आपका इंगित किया मिसरा बे बह्र  हो गया है । उस शे र  सुधार कर ऐसे कर रहा हूँ ------

हुस्न मे खोये पड़े अहदे नौ से

आ चलें , अब दिल लगाता कौन है  -- कुछ ठीक कह पाया क़्या ?  बताइयेगा 

आपका बहुत बहुत आभार ,

 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 26, 2015 at 8:42pm

छोड़िये , हमको बुलाता कौन है

खार सीने से लगाता कौन है

आप हैं गमगीन , खुद रोते रहें

अब भला कन्धा भिगाता कौन है

बहुत बेहतरीन गज़ल हुयी है आ० ढेरों दाद प्रेषित हैं!

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on June 26, 2015 at 3:16pm
चाँद बन तू , पास आयेंगे सभी
सूर्य के नज़दीक जाता कौन है

खूबसूरत शे’र हुआ है आदरणीय गिरिराज जी, दाद कुबूल करें

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