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ग़ज़ल :-गले प रख के वो तलवार बोले

बह्र :- मफ़ाइलुन मफ़ाइलुन फ़ऊलुन

गले प रख के वो तलवार बोले
वही कहना जो ये सरकार बोले

हमें बर्बाद कर देगा तिरा सच
मिरी बस्ती के इज़्ज़तदार बोले

हमारा ख़ानदानी वस्फ़ है ये
हमेशा जानिब-ए-हक़दार बोले

कई नामों से हमको जानते हैं
कोई तूफ़ाँ,कोई मंझधार बोले

बुराई पीठ के पीछे करेगा
मिरे मुँह पर ज़रा इक बार बोले

है मुझ को आरज़ू उस हमसफ़र की
जो वीरानों को भी गुलज़ार बोले

क़ुसूर इन शाईरों का भी नहीं जी
वही देंगे जो ये बाज़ार बोले

"समर" तुम दुश्मनों पर टूट पड़ना
सिपह सालार जब यलग़ार बोले

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on May 26, 2015 at 11:09pm
जनाब सौरभ पांडे जी,आदाब,आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया पाकर धन्य भी हुवा और मुतमइन भी,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 26, 2015 at 9:01pm

वाह वाह ! मतले से शुरु हुआ कमाल मक्ते तक बरकरार रहा..
मतले के लिए विशेष बधाई तो कह ही रहा हूँ, इन शेरों को भी बार-बार पढ रहा हूँ --
हमें बर्बाद कर देगा तिरा सच
मिरी बस्ती के इज़्ज़तदार बोले

कई नामों से हमको जानते हैं
कोई तूफ़ाँ,कोई मंझधार बोले

है मुझ को आरज़ू उस हमसफ़र की
जो वीरानों को भी गुलज़ार बोले

हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय ..

Comment by Samar kabeer on May 16, 2015 at 11:05pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी ,आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on May 16, 2015 at 11:05pm
जनाब हरी प्रकाश दुबे जी ,आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on May 16, 2015 at 11:04pm
जनाब वीनस केसरी जी ,आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 16, 2015 at 9:49am

क्या बात है ! आदरनीय समर कबीर भाई , पूरी ग़ज़ल बे मिसाल कही है , एक एक शे र  के लिये अलग अलग मुबारक बाद कुबूल करें ॥ बस पढ़ के मज़ा आ गया  ।

Comment by Hari Prakash Dubey on May 16, 2015 at 9:39am

आदरणीय समर कबीर सर ,संपूर्ण रचना ही शानदार है ,हार्दिक  बधाई आपको ! सादर 

Comment by वीनस केसरी on May 16, 2015 at 1:13am

जिंदाबाद ग़ज़ल है
वाह वाह .. एक एक शेर पर हज़ार बार दाद

एक बात की और ध्यान दिलाना चाहूंगा
मफ़ाइलुन - १२१२
मफ़ाईलुन - १२२२

Comment by Samar kabeer on May 15, 2015 at 2:45pm
जनाब श्री सुनील जी ,आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on May 15, 2015 at 2:45pm
जनाब मिथिलेश वामनकर जी ,आदाब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

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