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मन भावन पैगाम (दोहे )

मन भावन पैगाम सब ,रक्खे बड़े सम्हाल 
आते जब भी सामने,कहते सारा हाल ॥

स्नेह पगे जो शब्द हैं,करते अब मनुहार 
इक-इक पाती प्रेम की,कहती बात हजार ॥

आखर में जब तुम दिखो,भर आती है लाज 
आवेदन ये प्रेम का ,भर जाते  है आज ॥

बिना कहे सब बोलती,हृदय की ये बात
आमंत्रण देती रहीं ,सपनों की बारात ॥

पाती में मिलते रहे ,सूखे सुमन गुलाब
मन मंदिर ले बाचती, खुशबू भरी किताब॥

आता देखूँ डाकिया ,खिलें खुशी के फूल 
बंद लिफाफा प्रेम का,बुनता नैन दुकूल ॥

भावों भरे जो शब्द हैं ,करते है संवाद 
देते हैं अब भी मुझे,पिया तुम्हारी याद ॥

साथ तुम्हारे पालकी,आई थी जब गाँव 
पहनी थी रंग चूड़ियाँ ,महबर लागी पाँव ॥

मौलिक व अप्रकाशित 

कल्पना मिश्रा बाजपेई

Views: 679

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Comment by kalpna mishra bajpai on March 18, 2015 at 1:48pm

मैं आभारी हूँ आप सभी विशिष्ट और वरिष्ठ जनों की /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 18, 2015 at 1:47pm

अदरणीय  Saurabh Pandey जी आप बिल्कुल सही कह रहे है मैं कोशिश करूंगी सुधार की । बहुत आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 18, 2015 at 5:23am

आदरणीया कल्पनाजी, इस दोहा प्रयास पर शुभकामनाएँ.
प्रस्तुतियों पर थोड़ा और समय दिया करें तो शिल्प और संप्रेषणीयता दोनों से न्याय होगा.
हार्दिक शुभेच्छाएँ

Comment by Naveen Mani Tripathi on March 17, 2015 at 10:40pm
वाह बधाई कल्पना जी ।
Comment by Nirmal Nadeem on March 17, 2015 at 3:18pm

kya kahne waaah waaah waaah

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 17, 2015 at 4:21am

पाती में मिलते रहे ,सूखे सुमन गुलाब
मन मंदिर ले बाचती, खुशबू भरी किताब॥

भावपूर्ण दोहे ....बधाई 

Comment by kalpna mishra bajpai on March 16, 2015 at 8:29pm

आप सभी विशिष्ट आदरणीय जनों का हार्दिक हार्दिक आभार /सादर 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 16, 2015 at 7:10pm

आदरणीया कल्पना मिश्रा बाजपेई जी ,बहुत सुन्दर दोहावली है ,बधाई आपको ! सादर 

Comment by Shyam Mathpal on March 16, 2015 at 7:08pm

Aadarniya Kalpna Mishra Bajpai Ji,

Sangeet ki tarah har pankti .... bahut sundar.. sundar bhaw .... Badhai .

Comment by maharshi tripathi on March 16, 2015 at 5:48pm

इस भावपूर्ण, हृदयस्पर्शी दोहों पर हार्दिक बधाई आ.kalpna mishra जी |

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