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सजा-ए-मौत लिख डाली

1222 1222 1222 1222

तेरी आँखों में डूबा था यही अपराध था मेरा
जरा सी बात पर तूने सजा-ए-मौत लिख डाली--1

ये बिखरी जुल्फ मैं तेरी ,सँवारू हाथ से अपने
मेरे जज्बात पर तूने सजा-ए- मौत लिख डाली--2

सिले हैं होठ क्यों तूने  शिकायत की बजह क्या है
मिलन की रात पर तूने सजा-ए-मौत लिख डाली--3

तेरे होठों से होठों को जलाकर देख लेता मैं
मगर हर-बात पर तूने सजा-ए-मौत लिखडाली--4

बडी मुश्किल से गुजरा था खिजाओं से भरा मौसम
मगर बरसात पर तूने सजा-ए-मौत लिख डाली--5

उमेश कटारा 
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 729

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Comment by umesh katara on March 12, 2015 at 9:07am

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 12, 2015 at 9:07am

आदरणीय khursheed khairadi जी शुक्रिया

Comment by khursheed khairadi on March 12, 2015 at 8:54am

बडी मुश्किल से गुजरा था खिजाओं से भरा मौसम 
मगर बरसात पर तूने सजा-ए-मौत लिख डाली--5

आदरणीय उमेश जी उम्दा ग़ज़ल हुई है ,सादर अभिनन्दन |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 12, 2015 at 8:05am

बहुत बढिया गज़ल कही भाई उमेश कटारा जी , हार्दिक बधाई ।

Comment by umesh katara on March 12, 2015 at 7:21am

आदरणीय  Hari Prakash Dubeyजी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 12, 2015 at 7:20am

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तवजी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 12, 2015 at 7:20am

आदरणीय  Shyam Mathpalजी आभार

Comment by umesh katara on March 12, 2015 at 7:19am

आदरणीय maharshi tripathi जी आभार

Comment by umesh katara on March 12, 2015 at 7:19am

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 12, 2015 at 4:49am

आदरणीय उमेश जी खूबसूरत ग़ज़ल है....... बहुत सुन्दर बधाई आपको .... सादर 

जहाँ सुकरात पर तूने सजा-ए-मौत लिख डाली

नए हालात पर तूने सजा-ए-मौत लिख डाली

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